राष्ट्रीय ध्वज के स्वरूप वाले केक को काटने पर गरमाई सियासत: क्या तिरंगा केक काटना है राष्ट्रध्वज का अपमान? जानिए पूरा विवाद और कानूनी नियम
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी के वीडियो पर भाजपा का तीखा हमला; 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम' और ध्वज संहिता के नियमों पर छिड़ी देशव्यापी बहस

टुडे इंडिया न्यूज़ (MP) विशेष रिपोर्ट:
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के आकार का केक काटने का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद देश में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर राष्ट्रध्वज के अनादर का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है।
विवाद की मुख्य वजह और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में नेता तिरंगे के रंगों और स्वरूप में बने केक को काटते नज़र आ रहे हैं। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और भाजपा नेताओं ने इसे राष्ट्रीय ध्वज का सीधा अपमान करार दिया।
- भाजपा का आरोप: भाजपा के मुख्य प्रवक्ताओं और नेताओं ने तर्क दिया है कि तिरंगा देश की अस्मिता और शहीदों के बलिदान का प्रतीक है। इसे केक के रूप में बनाकर काटना और खाना राष्ट्रीय ध्वज आचार संहिता का उल्लंघन है। भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व से इस विषय पर देश से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।
- कांग्रेस का रुख: कांग्रेस समर्थकों व नेताओं का कहना है कि यह आयोजन देशप्रेम और उत्सव के भाव से किया गया था, तथा उनका इरादा राष्ट्रीय ध्वज का अनादर करने का कतई नहीं था।
क्या कहता है भारतीय कानून और ध्वज संहिता?
राष्ट्रीय ध्वज के प्रयोग और उसके सम्मान को लेकर भारत में स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद हैं:
- राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971): इस कानून की धारा 2 के तहत राष्ट्रीय ध्वज का किसी भी रूप में जलाया जाना, विकृत करना, कुचलना, या उसका सार्वजनिक रूप से अनादर करना गैर-जमानती अपराध माना गया है।
- भारतीय ध्वज संहिता, 2002 (Flag Code of India): ध्वज संहिता के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग किसी व्यावसायिक पोशाक, सजावट, रुमाल, कुशन या खाने-पीने की वस्तुओं (जैसे केक) पर इस प्रकार नहीं किया जा सकता जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो या उसे काटा-फाड़ा जाए।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, तिरंगे के पैटर्न का केक बनाकर उसे काटना या खाना ध्वज संहिता के स्थापित मानकों के विपरीत माना जाता है, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय प्रतीकों को चाकू से काटने और उपभोग करने की स्थिति बनती है। पूर्व में भी देश के विभिन्न राज्यों में तिरंगा केक काटने की घटनाओं पर पुलिस प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं।
निष्कर्ष:
राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रयोग को लेकर सजगता और संवेदनशीलता की आवश्यकता हमेशा रेखांकित की जाती रही है। जहाँ राजनीतिक दल इस घटना को लेकर आमने-सामने हैं, वहीं यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि देश के गौरवशाली प्रतीकों के उत्सव मनाते समय ‘भारतीय ध्वज संहिता’ के नियमों का कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है।




