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मध्य प्रदेश में 6 महीने के भीतर UCC! सीएम मोहन यादव ने गृह विभाग को दिए ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश

उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर MP में भी लागू होगा एक समान कानून; कैबिनेट बैठक में हुई बड़ी चर्चा

भोपाल | 8 अप्रैल, 2026 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में सभी समुदायों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार के कानून एक समान होंगे। इसके लिए उन्होंने गृह विभाग को तत्काल प्रक्रिया शुरू करने और इस साल के अंत तक कानून पारित करने का लक्ष्य दिया है।

समाचार का विस्तार

1. कैबिनेट बैठक में लिया गया निर्णय बीते मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ UCC पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने मंत्रियों से इस विषय पर सुझाव देने और अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन करने को कहा है।

2. ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनेगी कमेटी मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, मध्य प्रदेश का गृह विभाग अब UCC का मसौदा (Draft) तैयार करेगा। इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी उत्तराखंड और गुजरात में लागू या प्रस्तावित UCC कानूनों का अध्ययन करेगी और मध्य प्रदेश की भौगोलिक व सामाजिक स्थिति के अनुसार बदलावों का सुझाव देगी।

3. जनजातीय वर्ग को मिल सकती है छूट सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश में भी उत्तराखंड की तर्ज पर आदिवासी समुदायों (Tribals) को UCC के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। राज्य की बड़ी जनजातीय आबादी की परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया जा सकता है।

4. क्यों अहम है यह फैसला? * समानता: विवाह, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून होगा।

  • कानूनी सुगमता: अलग-अलग पर्सनल लॉ की जटिलताएं खत्म होंगी।
  • चुनावी वादे की पूर्ति: भाजपा के संकल्प पत्र में UCC एक प्रमुख मुद्दा रहा है।

5. विपक्ष और आगामी चुनौतियां हालांकि सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है, लेकिन विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा इसके विरोध की संभावना भी जताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले विधानसभा सत्र में इस विधेयक को पेश कर कानूनी रूप दिया जाए।

“हम प्रदेश में एक ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जहाँ कानून सबके लिए बराबर हो। यह कदम आने वाली पीढ़ियों के सामाजिक न्याय के लिए मील का पत्थर साबित होगा।” > — विश्वास सारंग, कैबिनेट मंत्री, मध्य प्रदेश

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