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​कर्नाटक: गृह लक्ष्मी योजना में बड़ा खुलासा, मृत लाभार्थियों के नाम पर जारी हुए 128 करोड़ रुपये

​डेटा मिलान में लापरवाही: 1.48 लाख मृत लाभार्थियों तक पहुँच रहा था पैसा ​128 करोड़ का पलीता: सरकारी खजाने को चूना, जांच के दायरे में विभाग

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार की बहुचर्चित ‘गृह लक्ष्मी’ योजना में एक बड़ी प्रशासनिक अनियमितता सामने आई है। विभागीय आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि राज्य में एक लाख 48 हजार से अधिक ऐसी महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में आर्थिक सहायता भेजी जा रही थी, जिनका देहांत हो चुका है। इस गड़बड़ी के कारण सरकारी खजाने को करीब 128 करोड़ रुपये का चूना लगा है।

​क्या है मामला?

​आंतरिक ऑडिट के दौरान यह पाया गया कि मृत लाभार्थियों के नाम पर भी पिछले कई महीनों तक नियमित रूप से 2,000 रुपये की किस्तें जारी होती रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह अनियमितता मुख्य रूप से डेटाबेस अपडेट न होने और तकनीकी खामियों के कारण हुई। चौंकाने वाली बात यह है कि इन मृत लाभार्थियों के खातों में जमा हुई राशि को उनके रिश्तेदारों द्वारा एटीएम और डिजिटल माध्यमों से निकाल लिया गया, जिससे इस धन की वसूली सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

​विपक्ष का हमला और सरकार की सफाई

​इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही राज्य की सियासत गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल BJP ने कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण जनता का पैसा गलत हाथों में जा रहा है।

​वहीं, कांग्रेस सरकार का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी समस्या है और सरकार इसे दुरुस्त करने के लिए कदम उठा रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार अपात्र लोगों को सूची से हटाने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही है। साथ ही, अब बायोमेट्रिक्स सत्यापन को भी अनिवार्य बनाने पर विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां न हों।

​सरकार के सामने बड़ी चुनौती

  • वसूली की समस्या: जो राशि मृत लाभार्थियों के खातों से पहले ही निकाली जा चुकी है, उसकी रिकवरी करना प्रशासन के लिए बेहद मुश्किल काम है।
  • डेटाबेस का शुद्धिकरण: मृत लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर करना और सक्रिय लाभार्थियों के डेटा को आधार/राशन कार्ड डेटा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
  • पारदर्शिता: इस घटना ने ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) सिस्टम की सुरक्षा और सटीकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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