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दतिया उपचुनाव के लिए बीजेपी का बड़ा दांव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया बनाए गए चुनाव प्रभारी

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद ग्वालियर-चंबल के 'महाराज' को मिली कमान; प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की जीत सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी

​भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में शुमार दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। इस बेहद अहम मुकाबले को जीतने के लिए पार्टी आलाकमान ने बड़ा फैसला लेते हुए केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को दतिया उपचुनाव का प्रभारी नियुक्त किया है।

​ग्वालियर-चंबल संभाग में सिंधिया के व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए संगठन ने उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि स्थानीय स्तर पर सभी समीकरणों को साधते हुए पार्टी की जीत सुनिश्चित की जा सके।

​क्यों खास है दतिया का यह उपचुनाव?

​यह उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि इसे ग्वालियर-चंबल की सियासत के बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

  • ​सीट खाली होने की वजह: कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक मामले में कोर्ट से सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी, जिसके कारण दतिया सीट खाली हुई है।
  • ​टिकट में बड़ा उलटफेर: बीजेपी ने इस बार चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अपने कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर संगठन के पुराने और जमीनी नेता आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है।
  • ​चुनाव की तारीखें: चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, दतिया उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे और 3 अगस्त को चुनावी नतीजे सामने आएंगे।

​सिंधिया के सामने बड़ी चुनौती: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद स्थानीय समर्थकों में उपजी असंतोष की स्थिति को संभालना और जातिगत समीकरणों (विशेषकर ब्राह्मण बाहुल्य फैक्टर) को आशुतोष तिवारी के पक्ष में मोड़ना ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए एक अग्निपरीक्षा जैसा होगा।

 

​राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ उपचुनावों के अनुभवों से सबक लेते हुए बीजेपी संगठन ने इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया को शुरुआत से ही फ्रंट फुट पर रखने का फैसला किया है। सिंधिया को प्रभारी बनाए जाने के बाद अब दतिया का यह चुनावी रण बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है।

​इस चुनावी हलचल और सीट के खाली होने की पूरी बैकस्टोरी को बेहतर ढंग से समझने के लिए आप दतिया उपचुनाव घोषणा रिपोर्ट देख सकते हैं, जिसमें चुनाव आयोग के फैसले और राजेंद्र भारती की सदस्यता जाने की पूरी जानकारी दी गई है।

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