Welcome to Today India News MP   Click to listen highlighted text! Welcome to Today India News MP
https://todayindianewsmp.live/wp-content/uploads/2024/01/jjujuu.gifUncategorizedटेक्नोलॉजीटॉप न्यूज़दिल्ली NCRदेशनईदिल्लीनिवाड़ीभोपालमध्य प्रदेशराजनीतिलोकसभाशिक्षासेवा तीर्थ PMOसोशल मीडिया प्लेटफार्म

​बड़ा बदलाव: UGC और AICTE जैसे कई रेगुलेटर्स की होगी छुट्टी, उच्च शिक्षा के लिए बनेगा एक ‘सुपर रेगुलेटर’; JPC की ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल’ पर जेपीसी की तैयारी पूरी, अगले हफ्ते लोकसभा स्पीकर को सौंपी जाएगी फाइनल रिपोर्ट; मौजूदा मानसून सत्र में ही पेश कर सकती है सरकार

टुडे इंडिया न्यूज़ एमपी (Today india news mp)

नई दिल्ली/भोपाल:

देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र (Higher Education Sector) में अब तक का सबसे बड़ा सुधार होने जा रहा है. ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानी जेपीसी (JPC) ने ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल’ पर अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है. इस क्रांतिकारी बिल का मुख्य उद्देश्य देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र को कई अलग-अलग रेगुलेटर्स की उलझन से निकालकर, केवल एक ही ‘सुपर रेगुलेटर’ के दायरे में लाना है.

​कमेटी की यह फाइनल रिपोर्ट अगले हफ्ते लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी जाएगी। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने संसद के मौजूदा मानसून सत्र में ही इस महत्वपूर्ण बिल को पारित कराने के लिए संसद पटल पर पेश करने की योजना बनाई है.

UGC, AICTE और NCTE का होगा विलय

​जेपीसी ने अपनी सिफारिशों में देश की उच्च शिक्षा को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है. कमेटी की सिफारिश के तहत:

  • एकल रेगुलेटर की स्थापना: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहीं कई रेगुलेटरी संस्थाओं जैसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) को समाप्त कर दिया जाएगा.
  • एक ही छत के नीचे सब: इन सभी संस्थाओं की जगह अब केवल एक ही शीर्ष नियामक संस्था—‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान’ काम करेगी.
  • सरलीकरण: इससे अलग-अलग संस्थाओं के नियमों के कारण होने वाली जटिलताओं और दोहरेपन से मुक्ति मिलेगी.
  • कैसा होगा नए रेगुलेटर का ढांचा?

​प्रस्तावित बिल के अनुसार, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (आयोग) के अधीन तीन प्रमुख विशेष परिषदें (Specialized Councils) काम करेंगी:

परिषद का नाम

मुख्य कार्य

नियामक परिषद (Regulatory Council)

संस्थानों की स्थापना के न्यूनतम मानक तय करना और शिकायतों का निपटारा करना।

मानक परिषद (Standards Council)

अकादमिक मानक और पाठ्यक्रमों के परिणामों (Learning Outcomes) को निर्धारित करना।

प्रत्यायन परिषद (Accreditation Council)

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग और उनकी गुणवत्ता (Accreditation) का मूल्यांकन करना।

ध्यान देने योग्य बात: इस नए सुपर रेगुलेटर के दायरे में तकनीकी शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training) और आर्किटेक्चर शिक्षा तो आएगी, लेकिन मेडिकल (Medical) और लीगल (Legal) यानी कानून की पढ़ाई को फिलहाल इस नियामक के दायरे से बाहर रखा गया है.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बड़ा कदम

​यह बिल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है. 18वीं लोकसभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा पेश किए गए इस बिल को विस्तृत समीक्षा के लिए 31 सदस्यीय जेपीसी (JPC) को भेजा गया था.

​कमेटी के इस कदम से न केवल सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के लिए नियम आसान होंगे, बल्कि अकादमिक उत्कृष्टता और अनुसंधान (Research) को भी बढ़ावा मिलेगा. अब देखना यह होगा कि अगले हफ्ते लोकसभा स्पीकर को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद संसद के इस मानसून सत्र में इस बिल पर क्या रुख रहता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!