भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, पुतिन से सीधी बातचीत के लिए तैयार हुए जेलेंस्की
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आया भारत। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति प्रयासों को सराहा, रूसी राष्ट्रपति पुतिन से आमने-सामने की चर्चा के लिए बने कूटनीतिक रास्ते। भारतीय कूटनीति की बड़ी सफलता, युद्ध के माहौल के बीच वैश्विक मंच पर शांति की उम्मीदें बढ़ीं।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी विशेष विस्तृत समाचार:
नई दिल्ली,रूस,यूक्रेन :-
चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक संघर्षों के बीच भारत ने वैश्विक शांति की दिशा में एक और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हासिल की है। नई दिल्ली में आयोजित हो रहे प्रतिष्ठित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) के दौरान रूस और यूक्रेन के रुख में आए बदलाव ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सीधी और आमने-सामने की बातचीत करने की अपनी सहमति जता दी है, जिसे भारत की मध्यस्थता और मजबूत कूटनीतिक प्रयासों का एक बड़ा परिणाम माना जा रहा है।
भारतीय कूटनीति और पीएम मोदी के शांति संदेश का असर
पिछले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय कूटनीतिक नेतृत्व ने रूस और यूक्रेन, दोनों देशों के साथ लगातार उच्च-स्तरीय संवाद बनाए रखा है। हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कीव का दौरा किया था, जिसके बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने खुलकर भारत की सराहना की थी। जेलेंस्की ने कहा था कि वे इस “अन्यायपूर्ण युद्ध” को समाप्त करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता और प्रधानमंत्री मोदी के शांतिपूर्ण प्रयासों के लिए बेहद आभारी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की निष्पक्ष और संतुलित कूटनीति के कारण ही आज युद्ध के मोर्चे पर वर्षों से अड़े रहे दोनों देश कूटनीतिक टेबल पर आमने-सामने आने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो रहे हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन बना संवाद का मंच
नई दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शिखर सम्मेलन के इतर एक बार फिर स्पष्ट किया कि रूस कूटनीतिक संवाद के रास्ते बंद नहीं करना चाहता है। हालांकि पुतिन ने यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन में सेना भेजने की किसी भी कोशिश पर कड़ी चेतावनी दी है और इसे ‘रूस के साथ सीधा युद्ध’ करार दिया है, लेकिन इसके साथ ही राजनीतिक हल निकालने के लिए द्विपक्षीय वार्ताओं के द्वार खुले रखने के संकेत भी मिले हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि वैश्विक मंच पर पश्चिमी देशों के तमाम प्रयासों के बावजूद, जिस तरह से ग्लोबल साउथ (Global South) का नेतृत्व करते हुए भारत ने रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखते हुए शांति का संदेश दिया है, वह बेजोड़ है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की कूटनीति ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े गतिरोधों को बातचीत की मेज पर लाने की कुव्वत रखता है।
आने वाले दिनों में इस सीधी बातचीत की पहल से रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान की दिशा में कोई ठोस रास्ता निकलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे पूरी दुनिया को बड़ी राहत मिल सकती है।




