’AAP सही रास्ते पर चलती तो राघव चड्ढा और अन्य लोग पार्टी नहीं छोड़ते’ : अन्ना हजारे ने केजरीवाल को घेरा
आम आदमी पार्टी में बड़ी 'टूट' पर गांधीवादी अन्ना हजारे की पहली तीखी प्रतिक्रिया; सात सांसदों के BJP में शामिल होने पर बोले- "नेतृत्व की गलती से उपजा संकट"

अहमदनगर/नई दिल्ली:
आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए साल 2026 का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट अब और गहरा गया है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के नेतृत्व में 7 सांसदों के सामूहिक इस्तीफे और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय के बाद, अन्ना आंदोलन के प्रणेता अन्ना हजारे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि में पत्रकारों से बात करते हुए अन्ना हजारे ने ‘आप’ नेतृत्व पर तीखा हमला बोला और इस टूट के लिए पार्टी की दिशा को जिम्मेदार ठहराया।
“पार्टी सही होती तो कोई नहीं छोड़ता” – अन्ना हजारे
अन्ना हजारे ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राय रखने और रास्ता चुनने का अधिकार है। उन्होंने कहा:
”अगर आम आदमी पार्टी सही रास्ते पर चलती, तो आज राघव चड्ढा और अन्य सांसदों को पार्टी छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। यह पार्टी नेतृत्व की गलती है। जब स्वार्थ और सत्ता की भूख बढ़ जाती है, तो लोग अपने सिद्धांतों को भूल जाते हैं। इन सांसदों ने जरूर पार्टी के भीतर किसी बड़ी परेशानी या घुटन का सामना किया होगा, तभी उन्होंने यह कदम उठाया।”
AAP में मची बड़ी भगदड़: 2/3 सांसदों का हुआ ‘विलय’
बता दें कि शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी ने AAP से नाता तोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। राघव चड्ढा ने खुद को “गलत पार्टी में सही आदमी” बताते हुए दावा किया कि राज्यसभा में पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों ने संवैधानिक प्रावधानों के तहत बीजेपी में विलय का फैसला किया है।
इन बड़े चेहरों ने छोड़ा साथ:
पार्टी छोड़ने वाले दिग्गजों की सूची लंबी है, जिसने केजरीवाल खेमे में खलबली मचा दी है:
- राघव चड्ढा: पूर्व राज्यसभा उपाध्यक्ष और पार्टी के बड़े रणनीतिकार।
- संदीप पाठक: संगठन महामंत्री, जिन्हें पंजाब और गुजरात जीत का श्रेय दिया जाता है।
- स्वाति मालीवाल: पूर्व DCW अध्यक्ष और मुखर नेता।
- अशोक मित्तल और हरभजन सिंह: प्रमुख चेहरे।
‘ऑपरेशन लोटस’ बनाम ‘अनैतिकता’
एक तरफ जहां अन्ना हजारे ने इसे AAP की नैतिक हार बताया है, वहीं आम आदमी पार्टी ने इसे बीजेपी का ‘ऑपरेशन लोटस’ करार दिया है। संजय सिंह और अन्य नेताओं का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों (ED-CBI) के डर से सांसदों को तोड़ा गया है। हालांकि, अन्ना हजारे की इस टिप्पणी ने पार्टी के ‘इमानदारी’ के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है।



