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​पीएम मोदी पर टिप्पणी: खड़गे की बढ़ी मुश्किलें, राज्यसभा सभापति ने ‘विशेषाधिकार हनन’ का मामला समिति को सौंपा

​भाजपा सांसदों के नोटिस पर सीपी राधाकृष्णन ने लिया कड़ा संज्ञान; अब विशेषाधिकार समिति करेगी मामले की जांच और रिपोर्ट

टुडे इंडिया न्यूज़ एमपी, मध्य प्रदेश:

​कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी का मामला अब तूल पकड़ गया है। भाजपा सांसदों द्वारा दायर ‘विशेषाधिकार हनन’ (Breach of Privilege) के नोटिस को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। सभापति ने इस मामले को जांच और रिपोर्ट के लिए सीधे ‘विशेषाधिकार समिति’ (Committee of Privileges) के पास भेज दिया है।

​सभापति का कड़ा रुख

भाजपा सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में सभापति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात कर एक औपचारिक नोटिस सौंपा था। सांसदों का तर्क था कि नेता प्रतिपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के लिए इस्तेमाल की गई भाषा न केवल अमर्यादित है, बल्कि यह संसदीय परंपराओं और सदन की गरिमा के खिलाफ है। सभापति ने मामले की गंभीरता को समझते हुए इसे तत्काल विशेषाधिकार समिति को सौंपते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

​क्या है पूरा मामला?

भाजपा सांसदों ने अपनी शिकायत में कहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने सार्वजनिक मंच से प्रधानमंत्री मोदी को लेकर जो टिप्पणी की, वह ‘अवैध’ और ‘असंसदीय’ है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष के वरिष्ठ नेता होने के नाते खड़गे को संवैधानिक पदों की मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए, लेकिन उनके हालिया बयानों ने राजनीतिक विमर्श के स्तर को नीचे गिराया है।

​अब आगे क्या होगा?

  • ​समिति की जांच: राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करेगी।
  • ​तथ्यों का परीक्षण: समिति घटना के वीडियो साक्ष्यों, बयानों और संसदीय नियमों के आलोक में तथ्यों का परीक्षण करेगी।
  • ​रिपोर्ट: जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट सभापति को सौंपेगी।
  • ​अगली कार्रवाई: यदि समिति खड़गे को दोषी पाती है, तो नियम अनुसार उन पर कार्यवाही की सिफारिश की जा सकती है।

​राजनीतिक गलियारों में हलचल

इस घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश सहित पूरे देश की राजनीति गरमा गई है। जहाँ एक ओर भाजपा इसे खड़गे के अहंकार और विपक्ष की हताशा का परिणाम बता रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दे रही है।

​राज्यसभा में विशेषाधिकार समिति को मामला सौंपे जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि समिति की रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकलता है और भविष्य में सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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