नर्मदा प्रोजेक्ट पर ऐतिहासिक फैसला: सरदार सरोवर बांध के 30 साल पुराने विवाद सुलझे; एमपी, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में बनी अंतिम सहमति
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किया 'वन-टाइम सेटलमेंट' समझौता; मध्य प्रदेश को मिलेगा लंबित हक, बिजली-पानी और पुनर्वास के विवादों का हुआ स्थायी खात्मा।

टुडे इंडिया न्यूज़ एमपी (Today India News MP)
नई दिल्ली/भोपाल:
देश की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजनाओं में से एक ‘नर्मदा परियोजना’ और ‘सरदार सरोवर बांध’ को लेकर पिछले तीन दशकों से चला आ रहा राज्यों का आपसी टकराव आखिरकार समाप्त हो गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इस समझौते के तहत नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (NWDT) के अंतर्गत सालों से लंबित वित्तीय देनदारियों, मुआवजे और लागत-साझाकरण (Cost-Sharing) के पेचीदा मुद्दों को ‘वन-टाइम सेटलमेंट’ के जरिए हमेशा के लिए सुलझा लिया गया है।
क्या था 30 साल पुराना पेंच?
सरदार सरोवर और इंदिरा सागर परियोजनाओं के निर्माण, डूब क्षेत्र में आए गांवों के विस्थापितों के पुनर्वास (R&R), भूमि मुआवजे और निर्माण कार्यों के लिए लिए गए कर्ज के ब्याज को लेकर चारों राज्यों के बीच वित्तीय दावों का बड़ा अंतर था। मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच मुआवजे की राशि को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी, जिससे दोनों राज्यों के बीच वित्तीय अनिश्चितता बनी हुई थी। इस नए समझौते ने अदालती मुकदमों और राजनीतिक गतिरोध को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा:
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) का एक बेहतरीन उदाहरण है। जब पड़ोसी राज्य समृद्ध होते हैं, तो उसका लाभ पूरे देश को मिलता है। पानी और बिजली चाहे जिस राज्य में उपयोग हो, उसका अंतिम लाभार्थी भारत का किसान और आम नागरिक ही है।”
मध्य प्रदेश (MP) को क्या होगा सीधा फायदा?
- लंबित राशि की रिकवरी: मुआवजे और पुनर्वास के मद में मध्य प्रदेश का जो हक अटका हुआ था, उसका रास्ता साफ होगा।
- नर्मदा घाटी विकास को रफ्तार: वित्तीय विवाद सुलझने से मध्य प्रदेश नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के आगामी प्रोजेक्ट्स पर बिना किसी रुकावट के तेजी से काम कर सकेगा।
- बिजली-पानी का बेहतर तालमेल: सरदार सरोवर बांध से पैदा होने वाली बिजली का सबसे बड़ा हिस्सा (करीब 57%) मध्य प्रदेश को मिलता है। इस समझौते के बाद गुजरात और एमपी के बीच ऊर्जा और जल वितरण का समन्वय और मजबूत होगा।
बैठक में ये दिग्गज रहे मौजूद
इस ऐतिहासिक समझौते के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उपस्थित रहे, जिन्होंने इस समझौते को देश के विकास के लिए एक मील का पत्थर बताया।
इस फैसले के बाद अब नर्मदा नदी के पानी और बिजली का उपयोग चारों राज्यों के विकास और किसानों की किस्मत बदलने में और अधिक पारदर्शिता के साथ किया जा सकेगा।




