निवाड़ी भाजपा जिला कार्यसमिति की दूसरी सूची भी विवादों के घेरे में: पहली सूची में खोट, तो दूसरी पर उठ रहे हैं वफादारी और पैठ पर बड़े सवाल!
पहली सूची पर विवाद के बाद आई नई सूची में भी गैर-भाजपा लोगों को जगह मिलने से कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश; पहली सूची पर सवालों के बाद जारी नई सूची ने बढ़ाई संगठन के भीतर बेचैनी; गैर-भाजपा पृष्ठभूमि के लोगों को जगह मिलने के आरोप से कार्यकर्ताओं में नाराजगी

निवाड़ी: टुडे इंडिया न्यूज एमपी
मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जिला कार्यसमिति के गठन के बाद से ही सियासी भूचाल मचा हुआ है। संगठन को मजबूत करने के लिए जारी की गई सूचियां पार्टी के भीतर ही अंतर्कलह और असंतोष का सबसे बड़ा केंद्र बन गई हैं। हैरानी की बात यह है कि पहली सूची के भारी विरोध और विवादों के साये में घिरने के बाद जब पार्टी ने डैमेज कंट्रोल के लिए दूसरी संशोधित सूची जारी की, तो वह भी विवादों के दलदल से बाहर नहीं निकल पाई है।भाजपा जिला कार्यसमिति के गठन को लेकर संगठन के भीतर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहली सूची सामने आने के बाद उठे सवालों के बीच दूसरी सूची जारी होने की चर्चा ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को फिर हवा दे दी है। कार्यकर्ताओं के एक वर्ग का आरोप है कि नई सूची में भी ऐसे लोगों को स्थान दिया गया है, जिनकी भाजपा संगठन के प्रति सक्रियता और राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
पहली सूची पर हुआ था जमकर हंगामा
सूत्रों के मुताबिक, निवाड़ी जिला भाजपा द्वारा जब कार्यसमिति की पहली सूची सार्वजनिक की गई थी, तो इसमें पार्टी के निष्ठावान, जमीन से जुड़े पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा का मामला सामने आया था। इसे लेकर संगठन के भीतर ही विरोध के सुर उठने लगे थे और सोशल मीडिया से लेकर बैठकों तक में जमकर फजीहत हुई थी। बढ़ते विरोध और असंतोष को थामने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने पहली सूची को दरकिनार करते हुए नई सूची जारी करने का निर्णय लिया था।
दूसरी सूची में ऐसे लोगों की एंट्री, जिनका भाजपा से दूर-दूर तक वास्ता नहीं
तथाकथित सुधार के बाद जब भाजपा जिला कार्यसमिति की दूसरी सूची सामने आई, तो विवाद थमने के बजाय और अधिक भड़क उठा। पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का आरोप है कि इस नई सूची में भी पारदर्शिता को ताक पर रख दिया गया है।
आरोप है कि दूसरी सूची में ऐसे चेहरों को और संरक्षकों के चहेतों को जगह दे दी गई है, जिनका आज तक जमीनी स्तर पर भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा, संघर्ष या गतिविधियों से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहा है। कई ऐसे लोगों को पदों से नवाज दिया गया है जो कभी अन्य दलों में सक्रिय रहे हैं या पूरी तरह से राजनीति से तटस्थ रहे हैं। इससे सालों-साल पार्टी का झंडा उठाने वाले उन कार्यकर्ताओं में भारी निराशा और गुस्सा है जो अपनी मेहनत के दम पर संगठन में जगह पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे। भाजपा में संगठनात्मक नियुक्तियां कार्यकर्ताओं के मनोबल से सीधे जुड़ी होती हैं। ऐसे में यदि सूची को लेकर असंतोष बढ़ता है तो इसका असर आने वाले संगठनात्मक कार्यक्रमों पर भी पड़ सकता है।
कार्यकर्ताओं का बड़ा सवाल: पहली और दूसरी में से किसे माना जाए सही?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद निवाड़ी जिले के राजनीतिक गलियारों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि आखिरकार इनमें से असली और सही सूची किसे माना जाए?
एक के बाद एक विवादास्पद सूचियां जारी होने से जहां एक ओर विपक्ष को भाजपा पर हमला करने का मौका मिल गया है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर ही यह चर्चा आम हो गई है कि क्या निवाड़ी में संगठन का संचालन नियमों और निष्ठा के आधार पर हो रहा है या फिर यह महज व्यक्तिगत वफादारी और भाई-भ भतीजावाद की भेंट चढ़ चुका है।
बहरहाल, निवाड़ी भाजपा में मचे इस घमासान ने संगठन के बड़े अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं और देखना यह होगा कि डैमेज कंट्रोल के मोर्चे पर बैठी पार्टी इस आंतरिक असंतोष को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है।
— ब्यूरो रिपोर्ट, टुडे इंडिया न्यूज़, मध्य प्रदेश




