पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूचियों मे चौकाने वाली गड़बड़िया, एक व्यक्ति को 389 मतदाताओं का पिता
एक ही अभिभावक से जुड़े सैकड़ों मतदाता, 2.06 लाख मामलों में छह से अधिक ‘बच्चे’; चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव से 9 फरवरी तक जवाब तलब किया

कोलकत्ता पश्चिम बंगाल।
पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूचियों में गंभीर और हैरान करने वाली अनियमितताएँ सामने आई हैं।
राज्य के विभिन्न जिलों से ऐसे कई मामले उजागर हुए हैं, जिनमें एक ही व्यक्ति को सैकड़ों मतदाताओं का पिता या अभिभावक दर्शाया गया है। यह स्थिति न केवल डेटा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर भी गंभीर चिंताएँ पैदा करती है।

बीरभूम जिले के नानूर विधानसभा क्षेत्र में एक चौंकाने वाले मामला। एक व्यक्ति को 389 मतदाताओं का पिता बताया गया है। इसी तरह हावड़ा जिले के सांकराइल इलाके में 310 मतदाताओं के साथ एक ही अभिभावक का नाम दर्ज पाया गया।
इसके अलावा राज्य में ऐसे सात मामले सामने आए हैं,

जहाँ एक ही व्यक्ति के बच्चों की संख्या 100 से अधिक दर्शाई गई है।
जिला-वार आंकड़ों पर नजर डालें तो मुर्शिदाबाद में 199 मतदाता एक ही माता-पिता से जुड़े पाए गए हैं।

दार्जिलिंग में यह संख्या 152, जलपाईगुड़ी के नागरकाटा क्षेत्र में 120, जबकि आसनसोल में 170 मतदाता एक ही व्यक्ति को अपना अभिभावक या माता-पिता बताते हुए दर्ज हैं।
ये आंकड़े मतदाता सूची के सत्यापन और डेटा एंट्री प्रक्रिया में गंभीर खामियों की ओर इशारा करते हैं।

रिकॉर्ड के अनुसार, पूरे राज्य में 2.06 लाख से अधिक ऐसे मामले दर्ज हैं, जहाँ एक मतदाता के छह से अधिक बच्चे दिखाए गए हैं। इनमें से 8,682 मामलों में यह संख्या दस से भी अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है। कि यह स्पष्ट रूप से डेटा मैनेजमेंट, फील्ड वेरिफिकेशन और डिजिटल एंट्री में व्यापक त्रुटियों का परिणाम हो सकता है।

इन खुलासों के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने कड़ा रुख अपनाते हुए बुधवार को राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र भेजा है।
आयोग ने पत्र में कई बिंदुओं पर तत्काल और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं तथा 9 फरवरी तक विस्तृत जवाब मांगा है। यह कदम SIR से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद उठाया गया है।

चुनाव आयोग ने संकेत दिए हैं कि मतदाता सूचियों की शुद्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रीढ़ है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में राज्य में SIR प्रक्रिया के तहत कठोर पुनः सत्यापन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होने की संभावना है।




