पाकिस्तान को नई ‘नकल’ पड़ी भारी: ईरान-अमेरिका जंग में मध्यस्थता का दांव हुआ फेल, दुनिया के सामने फिर हुई किरकिरी
भारत की 'विश्व-मित्र' छवि कॉपी करने की कोशिश में जुटा इस्लामाबाद; ईरान ने कराची जाने वाले जहाज को लौटाकर दिया बड़ा झटका

इस्लामाबाद/नई दिल्ली:
पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक तरफ जहाँ पूरी दुनिया ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है, वहीं पाकिस्तान ने इस संकट में ‘भारत’ बनने की कोशिश की, लेकिन उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर अपमान का सामना करना पड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति से बात कर शांति और ‘डी-एस्केलेशन’ (तनाव कम करने) की वकालत की थी, जिसे वैश्विक स्तर पर सराहा गया। भारत की इसी ‘शांतिदूत’ वाली छवि की नकल करने के चक्कर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया (X) पर एलान कर दिया कि पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता (Mediation) के लिए तैयार है। उन्होंने बाकायदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी विदेश मंत्री को टैग भी कर दिया।
ईरान ने दिया करारा जवाब
पाकिस्तान की इस ‘बिन बुलाए बाराती’ वाली पेशकश का जवाब ईरान ने कूटनीतिक नहीं, बल्कि कड़े एक्शन के साथ दिया। पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश के कुछ ही घंटों बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कराची जाने वाले एक मालवाहक जहाज को ‘अनुमति की कमी’ का हवाला देकर वापस लौटा दिया।
पूर्व राजनयिक के ‘अजीब’ बयान से और हुई बेइज्जती
हद तो तब हो गई जब पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने एक टीवी इंटरव्यू में कह दिया कि “अगर अमेरिका ने पाकिस्तान पर हमला किया, तो पाकिस्तान दिल्ली और मुंबई पर हमला करेगा।” इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तान का जमकर मजाक उड़ रहा है। लोग कह रहे हैं कि जिस देश के पास अपने जहाजों को सुरक्षित लाने की कूटनीतिक ताकत नहीं है, वह परमाणु हमले की खोखली धमकियां दे रहा है।
निष्कर्ष:
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी गिरती अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय अलगाव से ध्यान भटकाने के लिए भारत की नकल कर खुद को एक बड़ा ‘ग्लोबल प्लेयर’ दिखाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन ईरान के रुख ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया पाकिस्तान की बातों को गंभीरता से नहीं ले रही है।




