जन विश्वास बिल 2026 को संसद की मंजूरी: अब 700 से ज्यादा छोटे अपराधों में नहीं होगी जेल, ड्राइविंग लाइसेंस और चक्का जाम जैसे मामलों में बड़ी राहत
मोदी सरकार का 'इज ऑफ लिविंग' पर बड़ा प्रहार; 79 कानूनों के 717 प्रावधानों से हटा जेल का डर, अब केवल जुर्माने से होगा निपटारा।

नई दिल्ली/भोपाल।
देश के आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों को ‘इंस्पेक्टर राज’ और कानूनी पेचीदगियों से मुक्ति दिलाने की दिशा में मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। संसद ने ‘जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी है। इस बिल के कानून बनने के बाद अब ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल में देरी या नेशनल हाईवे पर चक्का जाम जैसे 700 से अधिक छोटे अपराधों के लिए जेल नहीं जाना होगा।
क्या हैं बड़े बदलाव?
इस बिल के जरिए सरकार ने 23 मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले 79 केंद्रीय अधिनियमों के 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर (Decriminalize) कर दिया है। मुख्य बदलाव निम्नलिखित हैं:
- ड्राइविंग लाइसेंस में राहत: अब ड्राइविंग लाइसेंस की एक्सपायरी के बाद 30 दिनों का ग्रेस पीरियड मिलेगा। इस दौरान लाइसेंस वैध माना जाएगा और मामूली देरी पर जेल या भारी कानूनी कार्रवाई के बजाय प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
- चक्का जाम और हाईवे: नेशनल हाईवे एक्ट के तहत सड़क को बाधित करने या असुरक्षित करने पर पहले जेल का प्रावधान था, जिसे अब सिविल पेनल्टी में बदल दिया गया है। हालांकि, जुर्माने की राशि ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक हो सकती है।
- बिजनेस में आसानी: व्यापारियों द्वारा की जाने वाली तकनीकी या प्रक्रियात्मक चूक (Procedural Lapses) को अब आपराधिक कृत्य नहीं माना जाएगा।
- मेट्रो में शोर और गंदगी: मेट्रो परिसर में थूकने, शोर मचाने या नियमों के उल्लंघन पर अब सीधे जेल नहीं होगी, बल्कि जुर्माना या चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा।
जेल की जगह जुर्माना और चेतावनी
सरकार ने एक नया एडजुडिकेशन मैकेनिज्म (निर्णयन तंत्र) पेश किया है। अब छोटे मामलों में पुलिस केस और अदालती ट्रायल के बजाय:
- पहले सलाह दी जाएगी।
- फिर चेतावनी (Warning) मिलेगी।
- अंत में मौद्रिक जुर्माना (Monetary Penalty) लगाया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया ‘ऐतिहासिक कदम’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल के पास होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा देने वाला है। उन्होंने कहा कि पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को खत्म कर नागरिकों पर से बेवजह का बोझ कम करना सरकार की प्राथमिकता है।
MP के नागरिकों पर असर
मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में छोटे दुकानदारों, ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों के लिए यह कानून किसी वरदान से कम नहीं है। अब आरटीओ (RTO) और अन्य विभागों के चक्कर काटने और जेल के डर से मुक्ति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अदालतों में लंबित करोड़ों मामलों के बोझ में भी कमी आएगी।
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