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​MP BJP News: मध्यप्रदेश भाजपा में संगठन का बड़ा फैसला! किसी भी जिलाध्यक्ष को नहीं मिलेगा विधानसभा या लोकसभा का टिकट?

​पार्टी आलाकमान का सख्त रुख: संगठन के काम में लगे नेताओं को चुनावी मैदान से दूर रखने की तैयारी, 'एक व्यक्ति, एक पद' के फॉर्मूले को कड़ाई से लागू करेगा भाजपा नेतृत्व।

भोपाल। मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और आगामी चुनावों में गुटबाजी को पूरी तरह खत्म करने के लिए भाजपा आलाकमान ने एक बेहद कड़ा और बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा संगठन ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश के किसी भी वर्तमान जिलाध्यक्ष को आने वाले मुख्य चुनावों (विधानसभा या लोकसभा) में पार्टी का टिकट नहीं दिया जाएगा।

​संगठन के इस कड़े रुख के बाद प्रदेश भर के उन जिलाध्यक्षों और स्थानीय स्तर के कद्दावर नेताओं में खलबली मच गई है, जो लंबे समय से संगठनात्मक पदों पर रहकर अपने लिए चुनावी जमीन तैयार कर रहे थे।

‘एक व्यक्ति, एक पद’ और संगठन सर्वोपरि का सिद्धांत

​भाजपा केंद्रीय नेतृत्व और प्रादेशिक संगठन का मानना है कि जिलाध्यक्ष का पद पूरी तरह से संगठन के विस्तार, कार्यकर्ताओं के सामंजस्य और पार्टी को बूथ स्तर पर मजबूत करने के लिए होता है। अगर जिलाध्यक्ष खुद को चुनावी दौड़ में शामिल कर लेता है, तो जिले के अन्य दावेदारों में असंतोष पनपता है और गुटबाजी बढ़ती है।

​पार्टी इस बार ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत को पूरी तरह जमीन पर उतारना चाहती है। संगठन का स्पष्ट संदेश है— “जिन्हें चुनाव लड़ना है, वे संगठन के दायित्वों से मुक्त रहें; और जो संगठन चला रहे हैं, वे पूरी निष्ठा से पार्टी को जिताने का काम करें।”

टिकट की आस लगाए नेताओं को झटका, नए चेहरों को मिलेगा मौका

​मध्यप्रदेश भाजपा के इस संभावित निर्णय से कई जिलों के समीकरण पूरी तरह बदलने वाले हैं। प्रदेश के कई जिलों में वर्तमान अध्यक्ष सीधे तौर पर टिकट के मुख्य दावेदार माने जा रहे थे। इस नई नीति के लागू होने से:

  • भीतरी कलह पर रोक: टिकट की दौड़ से जिलाध्यक्षों के बाहर होने पर जिले के अन्य कार्यकर्ताओं को निष्पक्ष काम करने का मौका मिलेगा।
  • नए चेहरों की एंट्री: पार्टी स्थानीय स्तर पर नए, युवा और जिताऊ चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर सकेगी।
  • संगठन को मजबूती: चुनाव के दौरान जिलाध्यक्ष बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ या क्षेत्र विशेष के मोह के, पूरे जिले की सभी सीटों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

नेताओं के पास क्या होगा विकल्प?

​पार्टी सूत्रों का कहना है कि यदि कोई जिलाध्यक्ष चुनाव लड़ने के लिए बेहद गंभीर है और उसका जनाधार मजबूत है, तो उसे चुनाव की घोषणा या टिकट वितरण प्रक्रिया शुरू होने से काफी पहले अपने संगठनात्मक पद से इस्तीफा देना होगा। पद पर रहते हुए किसी भी नाम पर विचार नहीं किया जाएगा।

​फिलहाल इस फैसले ने मध्यप्रदेश भाजपा के भीतर आंतरिक राजनीति की हलचल को तेज कर दिया है और अब देखना यह होगा कि इस कड़े नियम को लागू करने के बाद जमीनी स्तर पर नेताओं की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

– टुडे इंडिया न्यूज एमपी डेस्क, भोपाल

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