पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल: ममता बनर्जी टीएमसी अध्यक्ष पद से हटाई गईं, बागी गुट ने बनाई नई कमेटी
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी खेमे का बड़ा ऐलान; अरूप रॉय बने पार्टी के नए चेयरमैन, अभिषेक बनर्जी महासचिव पद से निलंबित

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक अभूतपूर्व और बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी पर अपना दावा ठोकते हुए ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटा दिया है। बागी गुट ने खुद को ही ‘असली तृणमूल’ घोषित करते हुए नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया है।
ममता और अभिषेक पर बड़ी कार्रवाई
न्यू टाउन में आयोजित बागी विधायकों और पार्षदों की एक विशेष बैठक के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया। बागी खेमे ने घोषणा की कि ममता बनर्जी अब पार्टी की अध्यक्ष नहीं हैं और उनकी जगह हावड़ा मध्य के विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही, पार्टी के दूसरे सबसे शक्तिशाली नेता और महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी उनके पद से निलंबित कर दिया गया है।
क्या है बगावत की वजह?
ऋतब्रत बनर्जी ने इस कदम के पीछे पार्टी के भीतर चल रहे ‘संवैधानिक संकट’ का हवाला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के संविधान के अनुसार हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्यसमिति का पुनर्गठन अनिवार्य है, लेकिन फरवरी 2022 के बाद से ऐसा नहीं हुआ। बागी गुट का दावा है कि संगठनात्मक ढांचा अपनी अवधि पूरी कर चुका था, इसलिए नई नेतृत्व प्रणाली का गठन आवश्यक था।
शक्ति प्रदर्शन और दावे
इस बागी बैठक में लगभग 60 विधायक और कोलकाता नगर निगम के करीब 70 पूर्व पार्षद शामिल हुए, जिससे ममता बनर्जी की पकड़ कमजोर होती नजर आ रही है। इस घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस अब स्पष्ट रूप से तीन गुटों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। एक ओर ममता बनर्जी समर्थित खेमा है, दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी का ‘असली टीएमसी’ गुट, और तीसरी ओर वे सांसद जिन्होंने राष्ट्रीय नागरिक पार्टी (NCP) में विलय की घोषणा की है।
इस राजनीतिक उलटफेर ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी का खेमा इस पर क्या जवाबी कार्रवाई करता है।




