लोकसभा में बढ़ेंगी सीटें: 2029 से लागू होगा महिला आरक्षण, 816 हो सकती है सदस्यों की संख्या
संविधान संशोधन की तैयारी: परिसीमन के बाद 273 सीटें महिलाओं के लिए होंगी आरक्षित; 2011 की जनगणना बनेगा आधार।

नई दिल्ली:
देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण संविधान संशोधन बिल लाने की तैयारी में है, जिसके जरिए लोकसभा की सीटों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी और महिला आरक्षण को जमीन पर उतारने का रोडमैप तैयार किया जाएगा।
क्या है सरकार का मास्टरप्लान?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार नए परिसीमन (Delimitation) के जरिए लोकसभा सीटों की वर्तमान संख्या को बढ़ाने जा रही है। इस बदलाव की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- बढ़ जाएगी सीटों की संख्या: लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 816 तक पहुँच सकती है।
- जनगणना का आधार: सीटों के इस नए बंटवारे के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जा सकता है।
- महिला आरक्षण का गणित: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत महिलाओं को मिलने वाला 33% आरक्षण 2029 के आम चुनाव से प्रभावी होगा। यदि सीटें 816 होती हैं, तो इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
क्यों जरूरी है यह संशोधन?
वर्तमान में लोकसभा सीटों की संख्या 1971 की जनगणना पर आधारित है। पिछले 50 वर्षों में जनसंख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे एक सांसद पर प्रतिनिधित्व का बोझ बढ़ा है। नया संविधान संशोधन बिल इन विसंगतियों को दूर करने और महिलाओं की भागीदारी को विधिवत सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है।
2029 के चुनाव में बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा
महिला आरक्षण बिल पारित होने के बाद से ही इसके लागू होने का इंतजार किया जा रहा है। नए परिसीमन के साथ इसे जोड़ने से न केवल महिलाओं को संसद में बड़ी हिस्सेदारी मिलेगी, बल्कि राज्यों के प्रतिनिधित्व के समीकरण भी बदल जाएंगे।




