Welcome to Today India News MP   Click to listen highlighted text! Welcome to Today India News MP
E-Paperhttps://todayindianewsmp.live/wp-content/uploads/2024/01/jjujuu.gifUncategorizedटॉप न्यूज़दिल्ली NCRदेशनईदिल्लीनिवाड़ीभोपालमध्य प्रदेशमध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघराजनीतिराज्यलोकसभाविधानसभासेवा तीर्थ PMOसोशल मीडिया प्लेटफार्म

वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर बड़ी खबर: 2029 से एक साथ चुनाव कराने की तैयारी तेज़, JPC तैयार कर रही कानूनी और संवैधानिक ढांचा

​99% जनता ने किया समर्थन; बार-बार चुनाव से होने वाले ₹7 लाख करोड़ के आर्थिक नुकसान पर गोवा बैठक में गहरा मंथन

टुडे इंडिया न्यूज एमपी

निष्पक्ष आवाज़, हर पल आपके साथ

नई दिल्ली/भोपाल:

देश में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कवायद काफी तेज हो गई है। संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से ही इस महा-योजना को लागू करने के लिए ज़रूरी कानूनी और संवैधानिक रूपरेखा तैयार करने में जुटी हुई है।

99% नागरिकों और संगठनों ने जताया भरोसा

​संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी के अनुसार, इस पूरे विषय पर अब तक मिले देशव्यापी सुझावों में से करीब 99% नागरिकों और संगठनों ने एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया है। हाल ही में गोवा में आयोजित जेपीसी की अहम बैठक में बार-बार चुनाव होने के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले ₹7 लाख करोड़ के भारी-भरकम आर्थिक प्रभाव पर भी गंभीर चर्चा हुई。

क्या है प्रस्तावित चुनावी फॉर्मूला?

​प्रस्तावित योजना के मुताबिक, इस बदलाव को चरणों में लागू किया जा सकता है:

  • पहला चरण (वर्ष 2029): लोकसभा चुनाव के साथ देश के लगभग 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं।
  • दूसरा चरण (वर्ष 2034 तक): इसके बाद अगले पांच वर्षों में शेष राज्यों को भी इसी चक्र में शामिल कर, 2034 तक पूरे देश को एक ही चुनावी कैलेंडर के तहत लाने का लक्ष्य है।

संविधान में करने होंगे बड़े बदलाव

​इस ऐतिहासिक सुधार को लागू करने के लिए भारतीय संविधान के कई अहम प्रावधानों में बदलाव की आवश्यकता होगी:

इन अनुच्छेदों में होगा संशोधन: मुख्य रूप से संविधान के अनुच्छेद 83, 172 और 356 सहित कई कानूनी प्रावधानों में संशोधन करना होगा।

 

मंजूरी की प्रक्रिया:

इस संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई (2/3) बहुमत के साथ-साथ देश के कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से मंजूरी मिलना अनिवार्य होगा।

अगला कदम

​फिलहाल जेपीसी विभिन्न राज्यों का दौरा कर और स्टेकहोल्डर्स से रायशुमारी कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रही है। इस रिपोर्ट को तैयार होने के बाद आगामी सत्रों में संसद के पटल पर पेश किया जाएगा, जिसके बाद इस ऐतिहासिक कदम पर अंतिम मुहर लग सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!