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बंगाल में भगवा सैलाब! 15 साल के ममता राज का अंत, ऐतिहासिक जीत के साथ ‘सोनार बांग्ला’ की ओर कदम

कहीं खुला 17 साल से बंद मंदिर, तो कहीं बदला सड़क का नाम—देखें बंगाल में परिवर्तन की वो 5 कहानियां जो बयां कर रही हैं नया राजनीतिक युग

कोलकाता/नई दिल्ली | 05 मई, 2026

​पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है। 2026 विधानसभा चुनाव के नतीजों ने न केवल सत्ता की कुर्सी बदली है, बल्कि बंगाल की गलियों और जनमानस की मानसिकता में भी बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। भाजपा ने 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल कर ममता बनर्जी के अजेय किले को ध्वस्त कर दिया है।

​इस परिवर्तन के बीच बंगाल से ऐसी 5 तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने पूरे देश का ध्यान खींचा है:

1. 17 साल बाद खुला दुर्गा मंदिर का द्वार

​आसनसोल में एक प्राचीन दुर्गा मंदिर, जो स्थानीय विवादों और कथित तुष्टीकरण की राजनीति के कारण पिछले 17 वर्षों से बंद पड़ा था, आज भारी जयघोष के साथ खोल दिया गया। स्थानीय निवासियों ने इसे ‘अंधकार की समाप्ति’ करार दिया है।

2. 12 साल बाद बदला सड़क का नाम

​उत्तर 24 परगना के बारासात इलाके में ‘मस्जिद बाड़ी रोड’ का नाम स्थानीय लोगों और नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों की मौजूदगी में बदलकर ‘नेताजी पल्ली रोड’ कर दिया गया। दावा है कि 12 साल से इसकी मांग हो रही थी, जिसे नई सरकार के आते ही जनभावना का सम्मान करते हुए पूरा किया गया।

3. सरकारी सचिवालय (नबन्ना) में जश्न

​हावड़ा स्थित राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’, जो अब तक नीले-सफेद रंगों और टीएमसी के दबदबे का गवाह था, वहां आज कर्मचारियों और आम जनता के बीच जीत का भारी उत्साह देखा गया। सचिवालय के गलियारों में पहली बार खुलकर परिवर्तन के नारे लगे।

4. केंद्रीय सुरक्षाबलों का भव्य स्वागत

​अक्सर विवादों और राजनीतिक हमलों का निशाना बनने वाले केंद्रीय सुरक्षाबलों (CAPF) का आज बंगाल की महिलाओं ने शंख और उल्लू ध्वनि (Ululoo) के साथ स्वागत किया। मतदाताओं ने शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने के लिए सुरक्षाबलों को फूलों की मालाएं पहनाईं।

5. बंगाल की हवाओं में ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष

​कभी जिस नारे पर सत्ता पक्ष को आपत्ति थी, आज कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल से लेकर ग्रामीण बंगाल की गलियों तक ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष गूंज रहा है। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि बंगाल में हुए ध्रुवीकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर उभरा है।

विशेष विश्लेषण: अंजना ओम कश्यप के साथ

​”यह केवल सरकार का बदलना नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक संस्कृति का एक नया अध्याय है। ममता बनर्जी का अपने गढ़ भवानीपुर से चुनाव हारना और भाजपा का दो-तिहाई बहुमत पाना यह साबित करता है कि बंगाल की जनता ने परिवर्तन की इस लहर को पूरी तरह आत्मसात कर लिया है।”

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