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​चीन की घेराबंदी या ‘चाइना प्रेम’? ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर राहुल गांधी के विरोध ने छेड़ा सियासी घमासान

केंद्र का दावा—ड्रैगन को रोकने के लिए जरूरी है यह मेगा प्रोजेक्ट; राहुल बोले—'पर्यावरण के नाम पर हो रहा महाघोटाला'

​नई दिल्ली/पोर्ट ब्लेयर:

​भारत के रणनीतिक रक्षक माने जा रहे ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ को लेकर देश की सियासत में उबाल आ गया है। जहाँ एक ओर केंद्र सरकार इसे चीन की विस्तारवादी नीति और हिंद महासागर में उसकी घुसपैठ को रोकने के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ बता रही है, वहीं कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे “प्रकृति के खिलाफ अपराध” और “महाघोटाला” करार देते हुए इसके विरोध का झंडा बुलंद कर दिया है।

​क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?

​लगभग 72,000 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी सिरे पर स्थित है। इसके तहत:

  • ​एक विशाल इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) का निर्माण।
  • ​एक रणनीतिक सैन्य हवाई अड्डा और नौसैनिक अड्डा।
  • ​एक आधुनिक ग्रीनफील्ड शहर और पावर प्लांट का विकास।

​सामरिक महत्व: यह द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) से मात्र 150 किलोमीटर दूर है, जहाँ से चीन का लगभग 75% ऊर्जा व्यापार गुजरता है। यहाँ भारत की मजबूत सैन्य उपस्थिति का मतलब है—चीन की गर्दन पर भारत का हाथ।

​राहुल गांधी के विरोध की मुख्य वजहें

​राहुल गांधी ने हाल ही में कैंपबेल बे का दौरा किया और इस प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल उठाए:

  1. ​पर्यावरण का विनाश: राहुल गांधी का दावा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए 160 वर्ग किलोमीटर के प्राचीन वर्षावनों को काटा जाएगा और लगभग 10 लाख पेड़ों की बलि दी जाएगी।
  2. ​आदिवासी अधिकार: उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ रहने वाले ‘निकोबारी’ और ‘शोंपेन’ आदिवासियों को उनकी पैतृक भूमि से बेदखल किया जा रहा है।
  3. ​भ्रष्टाचार का आरोप: उन्होंने इसे “विकास के नाम पर विनाश” बताते हुए इसे देश की प्राकृतिक संपदा की चोरी बताया है।

​BJP का पलटवार: ‘चाइना प्रेम’ या देश विरोध?

​भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार ने राहुल गांधी के इन आरोपों पर कड़ा प्रहार किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जब भी देश की सुरक्षा और चीन की घेराबंदी की बात आती है, कांग्रेस को पर्यावरण और आदिवासियों की याद आने लगती है।

​”राहुल गांधी का विरोध देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। यह प्रोजेक्ट भारत को आत्मनिर्भर बनाने और हिंद महासागर में चीन की दादागिरी खत्म करने के लिए अनिवार्य है। विपक्ष का एजेंडा सिर्फ विकास की राह में रोड़ा अटकाना है।” — भाजपा प्रवक्ता

 

​विशेषज्ञों की राय

​रक्षा विशेषज्ञों और पूर्व वायुसेना प्रमुखों का मानना है कि ग्रेट निकोबार में एक सशक्त सैन्य बेस न केवल भारत की समुद्री सुरक्षा को पुख्ता करेगा, बल्कि युद्ध जैसी स्थिति में यह एक ‘अचल विमानवाहक पोत’ (Unsinkable Aircraft Carrier) की तरह काम करेगा।

​निष्कर्ष:

अब सवाल यह उठता है कि क्या पर्यावरण की चिंता वाकई जायज है या फिर चीन के खिलाफ भारत की इस मजबूत घेराबंदी को कमजोर करने की यह कोई राजनीतिक चाल? फिलहाल, राहुल गांधी ने इस मुद्दे को संसद में उठाने का संकल्प लिया है, जिससे आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

​ब्यूरो रिपोर्ट, टुडे इंडिया न्यूज़ एमपी

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