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​देश ने सुन ली पीएम मोदी की अपील? 15 दिनों में 70% तक गिरी सोने की मांग, सराफा कारोबारी परेशान

​शादियों के सीजन में सूने पड़े बाजार; ग्राहकों की बेरुखी से छंटनी की कगार पर पहुंचे सोने के कारीगर, एमपी के बाजारों में भी दिखा बड़ा असर।

भोपाल/इंदौर (Today India News MP ब्यूरो):

वैश्विक संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने और ईंधन बचाने की अपील का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। देश सहित मध्य प्रदेश के प्रमुख सराफा बाजारों (इंदौर और भोपाल) से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 15 दिनों के भीतर सोने की मांग में लगभग 70% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। अचानक आई इस मंदी से ज्वेलर्स और इस उद्योग से जुड़े लाखों कारीगर बेहद परेशान हैं।

क्यों आई मांग में इतनी बड़ी गिरावट?

​ज्वेलर्स एसोसिएशन और आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस ऐतिहासिक मंदी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:

  • पीएम मोदी का देशव्यापी आह्वान: प्रधानमंत्री ने हाल ही में देश के फॉरेन एक्सचेंज (विदेशी मुद्रा भंडार) को बचाने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता से निपटने के लिए नागरिकों से अपील की थी कि वे सोने में भारी निवेश से बचें और जरूरत पड़ने पर ही खरीदारी करें।
  • आयात शुल्क (Import Duty) का असर: सोने पर लगने वाले भारी टैक्स और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर होने की वजह से आम उपभोक्ता खरीदारी से बच रहा है।
  • इन्वेस्टर्स ने खींचे हाथ: गहने पहनने वाली महिलाओं से ज्यादा उन निवेशकों ने पैर पीछे खींच लिए हैं जो किलोग्राम या सैकड़ों ग्राम में शुद्ध सोना खरीदकर तिजोरियों में रख देते थे।

सराफा कारोबारियों और कारीगरों की बढ़ी चिंता

​इस अचानक आई गिरावट ने ज्वेलरी इंडस्ट्री के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। मध्य प्रदेश सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है:

“यह शादियों का मुख्य सीजन है, जहां आमतौर पर पैर रखने की जगह नहीं होती थी, वहां आज शोरूम खाली पड़े हैं। देश में इस उद्योग से सीधे और परोक्ष रूप से लगभग 3 करोड़ लोग जुड़े हैं, जिनमें से 70% महिलाएं और छोटे कारीगर हैं। अगर मांग इसी तरह गिरी रही, तो रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।”

 

क्या कहते हैं आर्थिक विशेषज्ञ?

​अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीन के बाद भारत सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। भारत सालाना करीब 1000 मीट्रिक टन सोना आयात करता है, जिससे देश का एक बड़ा हिस्सा डॉलर के रूप में बाहर चला जाता है। पीएम मोदी की इस अपील का मकसद डॉलर की मांग को कम करना और कच्चे तेल (पेट्रोल-डीजल) जैसी अनिवार्य चीजों के लिए विदेशी मुद्रा सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही शॉर्ट-टर्म में ज्वेलर्स को नुकसान हो रहा है, लेकिन लंबी अवधि में यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।

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