पश्चिम बंगाल में CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा एक्शन: लागू हुआ CAA, अवैध घुसपैठियों को पकड़कर सीधे BSF को सौंपेगी पुलिस
'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' की नीति पर चलेगी नई सरकार; भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए BSF को सौंपी गई 27 किलोमीटर जमीन।

कोलकाता/भोपाल:
पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नई भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को लेकर बेहद कड़े और ऐतिहासिक फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को पूरी तरह प्रभावी करने की घोषणा की है। इसके साथ ही सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए एक नया ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ (पता लगाओ, हटाओ और वापस भेजो) फ्रेमवर्क लॉन्च किया है।
जो CAA के दायरे में नहीं, वे घुसपैठिए: मुख्यमंत्री
कोलकाता में राज्य सचिवालय ‘नवान्न’ में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ किया कि सीएए के तहत आने वाले शरणार्थियों को पूरा संरक्षण मिलेगा, लेकिन अवैध रूप से रह रहे लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा:
”31 दिसंबर 2024 तक भारत आए और CAA के दायरे में आने वाले समुदायों को नागरिकता कानून का पूरा लाभ मिलेगा, राज्य पुलिस उन्हें परेशान नहीं करेगी। लेकिन जो लोग इस कानून के दायरे में नहीं आते, वे अवैध घुसपैठिए माने जाएंगे। राज्य की पुलिस अब ऐसे घुसपैठियों को गिरफ्तार कर सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हवाले करेगी, जो उन्हें वापस उनके देश भेजने (Deport) की व्यवस्था करेगी।”
दशकों पुराना विवाद खत्म, बॉर्डर फेंसिंग के लिए BSF को मिली जमीन
सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर वर्षों से लंबित पड़ी कंटीले तारों की बाड़ (बाड़बंदी) के काम को भी हरी झंडी दे दी है। मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने आधिकारिक तौर पर BSF को विभिन्न सीमावर्ती जिलों में 27 किलोमीटर की दूरी में फेंसिंग और बॉर्डर आउटपोस्ट (BoPs) बनाने के लिए 75 एकड़ जमीन सौंप दी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल की कुल 2,200 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा में से करीब 1,600 किलोमीटर पर बाड़ लगाई जा चुकी है, जबकि 600 किलोमीटर का हिस्सा अब भी खुला हुआ है। उन्होंने पिछली सरकारों पर तुष्टीकरण की राजनीति के चलते सुरक्षा बलों को जमीन न देने का आरोप लगाया और वादा किया कि आने वाले समय में जहां भी सीमा सुरक्षा के लिए जमीन की जरूरत होगी, राज्य सरकार तुरंत BSF को उपलब्ध कराएगी।
पुलिस और BSF के बीच बढ़ेगा तालमेल
राज्य सरकार के इस फैसले के बाद अब बॉर्डर से लगे सभी जिलों के पुलिस थानों को अलर्ट कर दिया गया है। पिछले कई सालों से बंद पड़ी BSF, जिला प्रशासन और राज्य पुलिस की समन्वय बैठकें (Coordination Meetings) फिर से शुरू कर दी गई हैं ताकि घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें तुरंत डिपोर्ट किया जा सके।




