एमपी कांग्रेस में बड़ा धमाका: पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पार्टी से सस्पेंड
भितरघात और अनुशासनहीनता की शिकायतों के बाद AICC की बड़ी कार्रवाई, मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी से आदेश जारी

टुडे इंडिया न्यूज़ (Today India News) — ब्रेकिंग न्यूज
भोपाल / नई दिल्ली/दतिया:
मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने दतिया से पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है।
यह आदेश कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की स्वीकृति के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा 2 अगस्त 2026 को जारी किया गया है।

📋 आधिकारिक आदेश का मुख्य अंश
AICC द्वारा जारी संगठन के आदेश में लिखा गया है:
“अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के माननीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी की मंजूरी से, दतिया के पूर्व विधायक श्री राजेंद्र भारती को तत्काल प्रभाव से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया जाता है।”
इस आदेश की प्रतिलिपि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित आलाकमान के वरिष्ठ नेताओं को प्रेषित की गई है।
⚡ कार्रवाई की मुख्य वजह: भितरघात और अनुशासनहीनता
यद्यपि आधिकारिक पत्र में कारण का विस्तृत उल्लेख नहीं है, परंतु पार्टी सूत्रों और हालिया घटनाक्रमों के अनुसार इस निलंबन के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- प्रत्याशी द्वारा भितरघात की शिकायत: दतिया उपचुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने राजेंद्र भारती पर पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ काम करने और भाजपा के पक्ष में भितरघात (sabotage) करने का गंभीर आरोप लगाते हुए आलाकमान से शिकायत की थी।
- चुनाव प्रचार से दूरी: यह आरोप लगाया गया था कि राजेंद्र भारती चुनाव प्रचार के दौरान निष्क्रिय रहे और पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने से दूरी बनाए रखी।
- गुटबाजी व सार्वजनिक बयानबाजी: राजेंद्र भारती ने भी पलटवार करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को विरोधी दल के वरिष्ठ नेताओं से संचालित होने का आरोप लगाया था, जिसे पार्टी आलाकमान ने घोर अनुशासनहीनता और गुटबाजी माना।
📌 राजनीतिक मायने
राजेंद्र भारती दतिया क्षेत्र के प्रभावकारी नेताओं में गिने जाते हैं। चुनाव के बाद उपजे विवाद के बीच AICC द्वारा देर रात उठाया गया यह सख्त कदम यह संदेश देता है कि पार्टी अनुशासनहीनता और भितरघात करने वाले किसी भी बड़े चेहरे को बख्शने के मूड में नहीं है। इस निलंबन के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति और बुंदेलखंड अंचल में सियासी हलचल तेज हो गई है।




