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​रूसी सेना में शामिल होगा भारत का ‘ब्रह्मोस’, दुनिया के रक्षा बाजार में मचा हड़कंप

​अचूक मारक क्षमता और 'ऑपरेशन सिंदूर' में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद रूस ने भारत से की आधिकारिक बातचीत

रूस ,नईदिल्ली : रक्षा क्षेत्र में भारत ने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। ‘मेक इन इंडिया’ की सबसे बड़ी सफलता मानी जाने वाली ‘ब्रह्मोस’ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल अब केवल भारतीय सेना का ही नहीं, बल्कि रूसी सेना का भी हिस्सा बनने जा रही है। हाल के घटनाक्रमों में यह स्पष्ट हुआ है कि रूस ने इस मिसाइल को अपनी अग्रिम पंक्ति की रक्षा प्रणाली में शामिल करने की योजना बनाई है।

​ब्रह्मोस की बढ़ती धाक: रूस को क्यों पड़ी जरूरत?

​रक्षा जानकारों के मुताबिक, रूस का यह निर्णय कई बड़े रणनीतिक बदलावों की ओर इशारा करता है:

  • युद्ध में साबित क्षमता: हाल ही में संपन्न हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (मई 2025) में ब्रह्मोस मिसाइल ने अपनी अचूक मारक क्षमता का जो प्रदर्शन किया है, उसने वैश्विक सैन्य रणनीतिकारों को हैरान कर दिया है। इस ऑपरेशन में मिसाइल ने बेहद जटिल परिस्थितियों में अपने लक्ष्यों को भेदकर अपनी मारक सटीकता सिद्ध की है।
  • ध्वनि से तीन गुना रफ्तार: ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसकी गति है। यह ध्वनि की गति से तीन गुना (लगभग 3704 किमी/घंटा) अधिक तेजी से उड़ सकती है, जिससे दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक करने या रोकने में पूरी तरह विफल साबित होते हैं।
  • बहुआयामी उपयोग: रूस अब ब्रह्मोस के नेवल (नौसेना) और कोस्टल (तटीय) वेरिएंट्स को अपने जंगी जहाजों और तटीय सुरक्षा घेरे में तैनात करने पर विचार कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित समुद्री खतरे को तुरंत बेअसर किया जा सके।

​भारत-रूस रक्षा संबंधों का नया अध्याय

​यह सौदा भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाएगा। अब तक की स्थिति यह थी कि भारत, रूस से हथियार तकनीक खरीदता था, लेकिन ब्रह्मोस के इस सौदे के बाद भारत, रूस को दुनिया की सबसे घातक मिसाइल आपूर्ति करने वाला देश बन जाएगा। फिलीपींस के बाद रूस का यह कदम ब्रह्मोस की वैश्विक विश्वसनीयता पर एक बड़ी मुहर है।

​आत्मनिर्भर भारत की बड़ी जीत

​रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता पर गर्व करते हुए, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस का रूसी सेना में शामिल होना ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सबसे बड़ी वैश्विक जीत है। मिसाइल के बूस्टर, वॉरहेड और नेविगेशन सिस्टम में भारत ने बड़े पैमाने पर स्वदेशीकरण (Indigenization) किया है, जिससे इसकी निर्माण क्षमता और दक्षता में अभूतपूर्व सुधार आया है।

​रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइलों के प्रदर्शन की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि इन प्रणालियों ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय रक्षा उद्योग अब वैश्विक मानकों को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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