राम मंदिर प्रबंधन में बड़ा बदलाव: तिरुपति बालाजी की तर्ज पर अब अयोध्या में भी तैनात होगा ‘सीईओ’
चंदा चोरी विवाद और पारदर्शिता की मांग के बीच SIT ने की सिफारिश; प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने की कवायद तेज
अयोध्या/भोपाल:
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रबंधन में अब एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल ही में सामने आए चंदा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के विवादों के बाद, मंदिर प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, पेशेवर और जवाबदेह बनाने के लिए अब ‘तिरुपति मॉडल’ अपनाने पर मंथन तेज हो गया है। इसी कड़ी में मंदिर के सुचारू संचालन के लिए एक पूर्णकालिक ‘मुख्य कार्यकारी अधिकारी’ (CEO) की नियुक्ति की सिफारिश की गई है।
क्या है तिरुपति मॉडल?
आंध्र प्रदेश के तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) का प्रबंधन भारत के सबसे कुशल धार्मिक प्रबंधन मॉडलों में से एक माना जाता है। यहाँ एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (आमतौर पर कमिश्नर स्तर का) बतौर कार्यकारी अधिकारी नियुक्त होता है, जो मंदिर की दैनिक गतिविधियों, दान, प्रसाद वितरण और भक्तों की सुविधाओं का पूरा प्रबंधन देखता है। अयोध्या में भी अब इसी तर्ज पर एक पेशेवर प्रशासनिक ढांचे की जरूरत महसूस की जा रही है।
क्यों पड़ी सीईओ की जरूरत?
- वित्तीय पारदर्शिता: हाल ही में सामने आए चंदा गबन के आरोपों के बाद वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। एक पेशेवर सीईओ की मौजूदगी से ऑडिट और फंड मैनेजमेंट में पारदर्शिता आएगी।
- बढ़ती भीड़ का प्रबंधन: राम मंदिर परिसर में प्रतिदिन लगभग एक लाख श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का भी मानना है कि 71 एकड़ का यह परिसर अब किसी ‘छोटे जिले’ जैसा हो गया है, जिसे संभालने के लिए अनुभवी नौकरशाही विशेषज्ञ की आवश्यकता है।
- पेशेवर दृष्टिकोण: SIT (विशेष जांच दल) की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने और इसमें अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
बड़े बदलावों की आहट
सूत्रों के अनुसार, चंदा विवाद के बाद ट्रस्ट के कामकाज में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंपत राय ने महासचिव पद से और अनिल मिश्रा ने ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया है। जांच और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार अब ऐसे अनुभवी अधिकारियों की तलाश में है जो मंदिर के दैनिक कामकाज को ट्रस्ट के नीतिगत निर्णयों के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर संचालित कर सकें।
भक्तों का भरोसा सर्वोपरि
नृपेंद्र मिश्रा ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया था कि ट्रस्ट को तीर्थयात्रियों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जबकि दैनिक प्रबंधकीय और प्रशासनिक निर्णय सीईओ के अधीन होने चाहिए। आने वाले दिनों में सरकार इस पर अंतिम निर्णय लेगी कि क्या ट्रस्ट के उपनियमों में बदलाव करके नया पद सृजित किया जाएगा या मौजूदा ढांचे में ही किसी वरिष्ठ अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।




