नरोत्तम मिश्रा का फिर टूटा सपना: राज्यसभा की रेस में पिछड़े दिग्गज नेता
क्या पार्टी संगठन में बढ़ रही है नरोत्तम की दूरियां? समर्थकों में मायूसी

भोपाल, टुडे इंडिया न्यूज़ एमपी:
मध्य प्रदेश की सियासत में हमेशा चर्चाओं में रहने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का एक बार फिर से राज्यसभा जाने का सपना अधूरा रह गया है। आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए भाजपा की रणनीति और संभावित उम्मीदवारों की सूची में नाम न होने की चर्चाओं ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
राज्यसभा सीट पर टिकी थीं निगाहें
दतिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा के भविष्य को लेकर कयासों का दौर जारी है। जून 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए उन्हें एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा था। राजनीतिक जानकारों का मानना था कि राज्य के सबसे प्रभावशाली ब्राह्मण चेहरों में से एक होने और संसदीय मामलों के गहरे अनुभव के कारण पार्टी उन्हें उच्च सदन में मौका दे सकती है।
क्यों बनी यह स्थिति?
भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी इस बार राज्यसभा के लिए पूरी तरह से ‘सोशल और रीजनल बैलेंसिंग’ पर काम कर रही है। पार्टी की रणनीति अब जमीनी स्तर के उन नेताओं को मौका देने की है जो आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सामाजिक समीकरणों को साध सकें। नरोत्तम मिश्रा का नाम पैनल में चर्चाओं में जरूर था, लेकिन अंतिम निर्णय में पार्टी नेतृत्व ने अन्य समीकरणों को प्राथमिकता दी है।
सियासी सफर और चुनौतियां
दतिया से छह बार विधायक रह चुके नरोत्तम मिश्रा के पास सरकार और संगठन दोनों में काम करने का लंबा अनुभव है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही उनके राजनीतिक पुनर्वास को लेकर लगातार चर्चाएं चलती रही हैं। वे न केवल एक कुशल रणनीतिकार माने जाते हैं, बल्कि पार्टी के मुखर वक्ता के रूप में भी अपनी पहचान रखते हैं।
अगला कदम क्या होगा?
फिलहाल नरोत्तम मिश्रा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उनके समर्थकों में इस घटनाक्रम को लेकर काफी मायूसी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या नरोत्तम मिश्रा पार्टी के भीतर नई भूमिका की प्रतीक्षा करेंगे या संगठन में उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी?
फिलहाल के लिए, राज्यसभा की यह राह बंद होने को उनके ‘टूटते सपनों’ की कड़ी के रूप में ही देखा जा रहा है।
क्या आपको लगता है कि मध्य प्रदेश भाजपा में नरोत्तम मिश्रा के लिए अभी कोई बड़ी जिम्मेदारी शेष है, या अब उन्हें संगठन में अपनी पकड़ फिर से बनाने के लिए लंबा संघर्ष करना होगा?




