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​महाशक्ति के आगे नहीं झुका भारत: पीएम मोदी के कड़े रुख के सामने अमेरिका बेअसर, रूस से तेल आयात रहेगा जारी

अमेरिकी वेवर (छूट) की समय-सीमा खत्म होने के बाद भी भारत ने लिया संप्रभु फैसला; पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कहा— 'देशहित और एनर्जी सिक्योरिटी सर्वोपरि, किसी भी दबाव में नहीं रुकेगी तेल की खरीद।'

नई दिल्ली / भोपाल:

वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और संप्रभुता का लोहा मनवाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों या किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है। अमेरिका द्वारा रूस से तेल आयात पर दी गई विशेष छूट (Waiver) की अवधि समाप्त होने के बावजूद, भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने का कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है।

वेवर खत्म, पर भारत का रुख अडिग

​दरअसल, अमेरिका द्वारा रूसी तेल आयात को लेकर दी गई रियायत की समय-सीमा समाप्त हो गई है। वैश्विक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि इस समय-सीमा के बाद भारत पर अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव बढ़ेगा, लेकिन भारत सरकार ने इन सभी कयासों पर विराम लगा दिया है।

​केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के रुख को बेहद मजबूती से देश और दुनिया के सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:

​”रूस पर अमेरिकी वेवर को लेकर मैं यह साफ कर देना चाहती हूँ कि हम रूस से पहले भी तेल खरीद रहे थे—यानी वेवर से पहले भी, वेवर के दौरान भी और अब (वेवर खत्म होने के बाद) भी हमारी खरीद जारी है। हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘कमर्शियल सेंस’ (व्यापारिक समझ और देशहित) है।”

 

अमेरिका को पीछे हटने पर क्यों होना पड़ा मजबूर?

​रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) की नीति के कारण अमेरिका को भी भारत के इस कड़े रुख को स्वीकार करना पड़ा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, और ईरान संकट के चलते ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई बाधित है। ऐसे में भारत ने अमेरिका को दोटूक शब्दों में समझा दिया है कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश की ऊर्जा सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

​भारत द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद ने अमेरिकी प्रतिबंधों की धार को कुंद कर दिया है, जिससे अमेरिका भारत के खिलाफ कोई भी सख्त कदम उठाने से पीछे हटने को मजबूर हुआ है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रूसी तेल का आयात

​मार्केट इंटेलिजेंस फर्म ‘केपलर’ (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने मई के महीने में रूस से रिकॉर्ड स्तर पर कच्चे तेल का आयात किया है, जो लगभग 2.1 से 2.3 मिलियन बैरल प्रति दिन (b/d) तक पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, और वर्तमान में भारत की कुल तेल खरीद में रूस की हिस्सेदारी लगभग 45% है।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी की रिपोर्ट: देशहित सर्वोपरि

​इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि पीएम मोदी के कड़े और स्पष्ट स्टैंड के आगे सुपरपावर अमेरिका को भी जमीनी हकीकत को स्वीकार करना पड़ा है। भारत ने यह साबित कर दिया है कि उसकी नीतियां वॉशिंगटन या किसी अन्य विदेशी राजधानी से तय नहीं होतीं, बल्कि देश की जनता के हितों और आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखकर नई दिल्ली से तय की जाती हैं।

– ब्यूरो रिपोर्ट, टुडे इंडिया न्यूज एमपी

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