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**“जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया, उस दिन भारत की पहचान मिट जाएगी

धीरेंद्र शास्त्री के बयान से सियासी–सामाजिक हलचल** सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान, समर्थक–विरोधी आमने-सामने

Today India News MP | विशेष रिपोर्ट

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा—


“जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया, उस दिन भारत की पहचान मिट जाएगी।”
उनका यह कथन सामने आते ही देशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। बयान के वीडियो क्लिप्स फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर लाखों बार देखे और साझा किए जा चुके हैं।
क्या है बयान का संदर्भ?

धीरेंद्र शास्त्री अपने संबोधन में राष्ट्रीय पहचान, भारतीय संस्कृति और तिरंगे के सम्मान की बात कर रहे थे। उनके अनुसार, भारत की पहचान उसके राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी है, जिनसे किसी भी प्रकार का समझौता देश की आत्मा को नुकसान पहुंचा सकता है।

समर्थकों का पक्ष
शास्त्री के समर्थकों का कहना है कि—
यह बयान राष्ट्रवाद और तिरंगे के सम्मान की भावना को दर्शाता है
इसका उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा है

बयान को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है
समर्थकों ने सोशल मीडिया पर “तिरंगा हमारी शान” और “राष्ट्र पहले” जैसे हैशटैग भी चलाए।

विरोधियों की आपत्ति
वहीं, विरोधी वर्ग इस बयान को—
विवादास्पद और भड़काऊ
समाज में विभाजन पैदा करने वाला
संवेदनशील मुद्दों को हवा देने वाला
बताते हुए इसकी आलोचना कर रहा है। कई यूजर्स ने इस पर कार्रवाई की मांग भी की है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा

हालांकि अभी तक किसी प्रमुख राजनीतिक दल की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह बयान सियासी बयानबाजी का हिस्सा बन सकता है।

निष्कर्ष
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान एक बार फिर यह दिखाता है कि धार्मिक मंचों से दिए गए वक्तव्य किस तरह राष्ट्रीय स्तर की बहस का रूप ले लेते हैं। यह बयान जहां एक वर्ग के लिए राष्ट्रभक्ति की आवाज है, वहीं दूसरे वर्ग के लिए चिंता का विषय।

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