नारी शक्ति वंदन अधिनियम में होगा बड़ा बदलाव: केंद्र सरकार ने मई में बुलाया संसद का 2 दिवसीय विशेष सत्र
जनगणना और परिसीमन की शर्त हटने के आसार, लोकसभा सीटों की संख्या 816 करने का प्रस्ताव; 2029 से पहले लागू हो सकता है महिला आरक्षण।

नई दिल्ली/भोपाल:
केंद्र की मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) को धरातल पर उतारने के लिए एक बड़ा विधायी कदम उठाने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार आगामी मई माह में संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने जा रही है। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून में महत्वपूर्ण संशोधन करना है, ताकि इसे बिना किसी देरी के लागू किया जा सके।
प्रमुख संशोधन और प्रस्तावित बदलाव
इस विशेष सत्र के दौरान सरकार दो महत्वपूर्ण बिल पेश कर सकती है:
- शर्तों में ढील: वर्तमान कानून के अनुसार, महिला आरक्षण नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) के बाद ही लागू होना था। प्रस्तावित संशोधन में इस शर्त को हटाकर आरक्षण को 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करने का प्रावधान किया जा सकता है।
- सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी: चर्चा है कि लोकसभा की कुल सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 किया जा सकता है (लगभग 50% की वृद्धि)। इसमें से एक-तिहाई यानी 273 सीटें सीधे महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- मौजूदा ढांचे की सुरक्षा: सीटों की संख्या बढ़ाने के पीछे तर्क यह है कि महिला आरक्षण लागू होने पर वर्तमान पुरुष सांसदों या क्षेत्रीय समीकरणों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
क्यों पड़ी विशेष सत्र की जरूरत?
मूल कानून (106वां संविधान संशोधन अधिनियम) के क्रियान्वयन में हो रही देरी को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर था। सरकार अब इसे 2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले विधानसभा चुनावों (जैसे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड 2027) में लागू करने की तैयारी में है। विशेष सत्र बुलाने का निर्णय यह संकेत देता है कि सरकार इस मुद्दे पर त्वरित परिणाम चाहती है।
विपक्ष का रुख और राजनीतिक हलचल
विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस ने इसे सरकार का ‘यू-टर्न’ बताया है। विपक्षी दलों का कहना है कि जब 2023 में यह बिल आया था, तब उन्होंने इसे तुरंत लागू करने की मांग की थी, जिसे सरकार ने उस वक्त तकनीकी कारणों से ठुकरा दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेताओं ने इस पर चर्चा के लिए ‘सर्वदलीय बैठक’ बुलाने की मांग की है।
क्या बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा?
यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का अब तक का सबसे बड़ा स्वरूप देखने को मिलेगा।
- उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 तक हो सकती हैं।
- मध्य प्रदेश में भी लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
- SC/ST वर्ग के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी 33% आरक्षण महिलाओं के लिए सुनिश्चित किया जाएगा।
निष्कर्ष:
मई में होने वाला यह विशेष सत्र न केवल महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है, बल्कि यह भविष्य के चुनावी समीकरणों को भी पूरी तरह बदल कर रख देगा। ‘टुडे इंडिया न्यूज एमपी’ इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।




