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MP Fake Passport Racket: 9 साल से देश में छुपा था फर्जी पासपोर्ट कांड का मास्टरमाइंड, STF की जांच में मिले बेहद खतरनाक और तगड़े कनेक्शन
फर्जी दस्तावेजों के दम पर 70 से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठियों के बनवाए भारतीय पासपोर्ट; संवेदनशील सैन्य ठिकानों के पास बनाए गए थे ठिकाने, 12 पुलिस अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध।

टुडे इंडिया न्यूज (मध्य प्रदेश)
ग्वालियर/भोपाल:
मध्य प्रदेश में बहुचर्चित और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फर्जी पासपोर्ट रैकेट (MP Fake Passport Racket) को लेकर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में रोज़ाना नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का मास्टरमाइंड रियाल चौधरी निकला है, जो पिछले 9 सालों से देश के भीतर अवैध रूप से छिपा हुआ था। एसटीएफ की पूछताछ में पता चला है कि शातिर मास्टरमाइंड ने देश के सामरिक और संवेदनशील सैन्य ठिकानों के पास अपने सेफ हाउस बनाए थे, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
प्रमुख खुलासे और खास बातें:
- 9 साल से देश में अवैध रूप से रह रहा था मास्टरमाइंड: एसटीएफ की पूछताछ में मास्टरमाइंड रियाल चौधरी ने स्वीकार किया है कि वह करीब 9 साल पहले (2017 में) अवैध तरीके से बांग्लादेश की सीमा लांघकर भारत में दाखिल हुआ था। कुछ समय असम में बिताने के बाद उसने धर्म की आड़ (बौद्ध भिक्षु का चोला) ली और मध्य प्रदेश को अपना नया ठिकाना बनाया।
- संवेदनशील सैन्य इलाकों के पास बनाए ठिकाने:
- आमला (बैतूल): रियाल ने बैतूल के आमला स्थित बौद्ध विहार को अपना केंद्र बनाया, जो देश के प्रमुख वायुसेना स्टेशन (28 इक्विपमेंट डिपो) से महज 3-4 किमी की दूरी पर है।
- डबरा (ग्वालियर): ग्वालियर के डबरा स्थित सिमरिया गांव के बौद्ध विहार से भी फर्जी पासपोर्ट तैयार कराए गए, जिसकी दूरी टेकनपुर स्थित प्रतिष्ठित बीएसएफ अकादमी से सिर्फ 8-8.5 किमी है।
है।
- 70 से अधिक पासपोर्ट्स की जांच जारी: इस रैकेट के जरिए भोपाल के अन्ना नगर स्थित बौद्ध मठ, ग्वालियर के डबरा, बैतूल और छिंदवाड़ा-पांढुर्णा क्षेत्रों से करीब 70 से ज्यादा फर्जी पासपोर्ट बनवाए जाने का खुलासा हुआ है। इनमें से अकेले भोपाल के एक पते से 40 पासपोर्ट जारी किए गए थे।
- पुलिस वेरिफिकेशन पर गंभीर सवाल और अफसरों पर शिकंजा: जांच में यह भी सामने आया है कि पासपोर्ट आवेदन थानों में पहुंचने से पहले ही ‘अर्जेंट’ कहकर पास कराने के लिए फोन आ जाते थे। इस पूरे फर्जीवाड़े में भोपाल, ग्वालियर, बैतूल और छिंदवाड़ा के लगभग 12 पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिन पर एसटीएफ का शिकंजा कसता जा रहा है।
- गिरफ्तारियां: एसटीएफ अब तक मास्टरमाइंड रियाल चौधरी सहित विप्लव अधिकारी, प्रयान रॉय, जॉय चौधरी और भोपाल के एक दलाल नसीम अख्तर समेत कई आरोपियों को दबोच चुकी है, तथा मामले की गहराई से छानबीन जारी है।
एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी पासपोर्ट्स का इस्तेमाल करके कितने घुसपैठिए विदेश भागे हैं और इस देशविरोधी सिंडिकेट के तार किन-किन अन्य राज्यों व लोगों से जुड़े हुए हैं।




