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अजमेर दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा, सिविल कोर्ट ने याचिका की स्वीकार

अजमेर/नई दिल्ली। सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की अजमेर स्थित दरगाह को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से दरगाह परिसर में

प्राचीन शिव मंदिर होने का दावा करते हुए सिविल कोर्ट में याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह के माध्यम से दायर इस याचिका को सोमवार को अदालत ने सुनवाई के बाद स्वीकार कर लिया।

केंद्र और राज्य सरकार के विभागों को जारी हुआ नोटिस
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, सिविल कोर्ट ने इस मामले में
राजस्थान सरकार के पुरातत्व (आर्कियोलॉजी) विभाग,
केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय,
केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय
को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को निर्धारित की है।

दरगाह परिसर में शिव मंदिर होने का दावा।
याचिका में कहा गया है कि दरगाह परिसर के भीतर शिव मंदिर होने से संबंधित राजस्व दस्तावेज और ऐतिहासिक अभिलेख मौजूद हैं, जिन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये दस्तावेज स्थल की प्राचीन धार्मिक पहचान की पुष्टि करते हैं।

अयोध्या, काशी और सोमनाथ से की गई तुलना
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस तरह
अयोध्या,
काशी,
संभल और
सोमनाथ
में प्राचीन मंदिरों के साक्ष्य सामने आए, उसी प्रकार पृथ्वीराज चौहान की नगरी अजमेर में स्थित एक प्राचीन महादेव मंदिर को आक्रांताओं द्वारा नष्ट कर उसके स्थान पर दरगाह का निर्माण कराया गया।

ऐतिहासिक और पुरातत्व जाँच की मांग।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि दरगाह परिसर की पुरातात्विक और ऐतिहासिक जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और स्थल के मूल स्वरूप का पता लगाया जा सके।

21 फरवरी को तय होगी आगे की दिशा
फिलहाल अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद सभी की निगाहें 21 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मामले में आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

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