क्या निवाड़ी जिले में जनसुनवाई बनी दबंगों का सहारा? कमिश्नर के आदेश के बाद भी कब्जा मुक्त नहीं हुई जमीन, चौथी बार जनसुनवाई में पहुंचे पीड़ित भाई
प्रशासनिक सुस्ती से तंग आकर पीड़ितों ने तहसील कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने की दी चेतावनी।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी
मुख्य विषय
पृथ्वीपुर थाना क्षेत्र के करगुवा गांव का मामला: राजस्व कमिश्नर सागर के स्पष्ट आदेश के बावजूद दबंगों के कब्जे में है जमीन।
- न्यायालय से हक में फैसला मिलने के बाद भी चार बार कलेक्टर और तीन बार एसडीएम की जनसुनवाई में चक्कर काटने को मजबूर हुए पीड़ित।
पृथ्वीपुर/निवाड़ी:
मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी जनसुनवाई प्रणाली पर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। क्या वास्तव में निवाड़ी जिले में जनसुनवाई दबंगों का सहारा बनती जा रही है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि एक तरफ सरकार आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पृथ्वीपुर थाना क्षेत्र के करगुवा गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां राजस्व कमिश्नर के स्पष्ट आदेश के बावजूद एक गरीब परिवार को उसकी जमीन का कब्जा नहीं मिल पा रहा है। न्याय की आस में पीड़ित भाइयों को बार-बार जनसुनवाई के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
करगुवा निवासी पीड़ित दो भाई, हद्दू एवं मुल्ली पुत्र लटोरे कुशवाहा ने बताया कि उनकी पतेती जमीन (खसरा नंबर 603/2/1/1, रकबा 0.034 हेक्टेयर) पर भैयन कुशवाहा एवं अन्य लोगों द्वारा जबरन और कथित तौर पर कब्जा किया गया है। इस मामले में पृथ्वीपुर तहसील एवं एसडीएम न्यायालय से फैसला पीड़ितों के पक्ष में आया था। इसके बाद कब्जाधारियों ने कमिश्नर सागर की अदालत में अपील की थी, जिसे कमिश्नर की अदालत ने खारिज कर दिया।
कमिश्नर सागर द्वारा 12 मई 2026 को आदेश जारी कर तहसीलदार को उक्त जमीन को कब्जाधारियों से मुक्त कराने के सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद आज तक पीड़ितों को उनकी जमीन का वैध कब्जा नहीं मिल सका है।
चौथी बार कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे पीड़ित
न्याय न मिलने से आहत पीड़ित हद्दू और मुल्ली 6 अक्टूबर को चौथी बार निवाड़ी कलेक्टर की जनसुनवाई में लिखित आवेदन लेकर पहुंचे। दोनों भाइयों का कहना है कि वे कमिश्नर के आदेश के बाद अब तक चार बार कलेक्टर की जनसुनवाई में और तीन बार पृथ्वीपुर एसडीएम की जनसुनवाई में गुहार लगा चुके हैं।
मंगलवार को जब वे अपनी फरियाद लेकर दोबारा कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे, तो उनका आरोप है कि उन्हें वहां से भी केवल आश्वासन मिला और एसडीएम के पास मामला दिखाने को कहा गया, लेकिन वहां पहुंचने पर भी उनकी सुनवाई नहीं हुई। हालांकि, इन गंभीर आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
धरने पर बैठने की चेतावनी
लंबे समय से राजस्व अधिकारियों और न्यायालयों के चक्कर काटकर थक चुके दोनों पीड़ित भाइयों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कमिश्नर के आदेश का पालन कराकर उनकी जमीन को कब्जा मुक्त नहीं कराया गया, तो वे मजबूरन तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठेंगे।
अब देखने यह होगा कि सुस्त प्रशासनिक तंत्र कमिश्नर के आदेश के अनुपालन में क्या कार्रवाई करता है और इन पीड़ित भाइयों की फरियाद पर कब तक न्याय मिल पाता है।




