निवाड़ी नगर परिषद कार्यालय में बड़ा प्रशासनिक विवाद: सामान्य शाखा के आवंटित कक्ष क्रमांक 17 पर अनधिकृत ताला और भारी साज-सज्जा से मचा हड़कंप! पार्षद गजेन्द्र राय ने सीएमओ को सौंपा कड़ा शिकायती पत्र; कलेक्टर के नाम का हवाला देकर भ्रम फैलाने वालों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग।
शासकीय आदेशों की धज्जियाँ: 6 अगस्त 2026 के आधिकारिक आदेश के बावजूद सामान्य शाखा के कक्ष पर अवैध कब्जा और ताला लगाने का सनसनीखेज मामला। कलेक्टर के नाम का दुरुपयोग: वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के नाम पर जनता और कर्मचारियों को गुमराह करने का आरोप, अभिलेख सुरक्षित रखने की चेतावनी। पार्षद की दो-टूक चेतावनी: यदि जल्द नहीं खुली कक्ष की तालेबंदी और नहीं हुई वैधानिक कार्रवाई, तो उच्च न्यायालय और सक्षम प्राधिकारियों का दरवाजा खटखटाएंगे।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी
निवाड़ी मध्यप्रदेश:-
मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में प्रशासनिक व्यवस्थाओं और कार्यालयीन अनुशासन को लेकर एक नया और गंभीर विवाद सामने आया है। नगर परिषद निवाड़ी के वार्ड से लोकप्रिय निर्वाचित पार्षद गजेन्द्र राय ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को एक अत्यंत कड़क और तथ्यपरक शिकायती पत्र सौंपते हुए शासकीय कार्यालय के एक महत्वपूर्ण कक्ष पर अनधिकृत कब्जा, अवैध ताला लगाने, बिना अनुमति भारी-सज्जा (Renovation) कराने और जिला कलेक्टर के नाम का दुरुपयोग कर भारी भ्रम फैलाने के मामलों में तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायती पत्र के अनुसार, नगर परिषद निवाड़ी के आधिकारिक आदेश क्रमांक स्था./न.परि./2026, दिनांक 06.08.2026 के तहत नवीन नगर परिषद कार्यालय के कक्ष क्रमांक 17 को विधिवत रूप से “सामान्य शाखा” के संचालन हेतु आवंटित किया गया था। प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत इस कक्ष का उपयोग कार्यालयीन कार्यों और आम जनता की सहूलियत के लिए होना था।
किंतु, इसके ठीक विपरीत इस कक्ष पर अनधिकृत रूप से ताला जड़ दिया गया है और अंदर भारी-भरकम साज-सज्जा (Interior Decoration) कराई जा रही है। जब कार्यालयीन स्तर पर मौखिक पूछताछ की गई, तो यह तथ्य सामने आया कि यह साज-सज्जा नगर परिषद प्रशासन द्वारा नहीं कराई जा रही है।
कलेक्टर महोदया के नाम पर गंभीर भ्रम फैलाने का आरोप
मामले को और अधिक संदिग्ध तब माना गया जब आम नागरिकों और कार्यालयीन कर्मचारियों द्वारा कक्ष के संबंध में पूछताछ करने पर यह कहकर भ्रमित किया जाने लगा कि “यह कलेक्टर महोदया का कमरा है”। पार्षद गजेन्द्र राय ने इसे अत्यंत गंभीर श्रेणी का अपराध और प्रशासनिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताया है। उनका कहना है कि किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के गरिमामयी नाम का आड़ लेकर शासकीय कक्ष के वास्तविक स्वरूप और उपयोग को छिपाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।
पार्षद द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें
शिकायतकर्ता पार्षद ने प्रशासन के समक्ष 6 सूत्रीय स्पष्ट मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- तत्काल ताला खुलवाएं: कक्ष क्रमांक 17 का ताला तुरंत खुलवाकर उसे 6 अगस्त के आदेशानुसार सामान्य शाखा को सौंपा जाए।
- सज्जा की फंडिंग की जाँच: कक्ष में किसके खर्चे और किसकी अनुमति से साज-सज्जा कराई गई, इसकी उच्चस्तरीय जांच हो।
- ताला लगाने वालों पर कार्रवाई: ताला लगाने वाले दोषियों की पहचान कर विधिक प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की जाए।
- कलेक्टर के नाम के दुरुपयोग की जांच: प्रशासनिक प्रमुख के नाम पर जनता को गुमराह करने वालों पर सख्त विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई हो।
- अभिलेखों की सुरक्षा: इस पूरे प्रकरण से जुड़ी नोटशीट, अनुमति आदेश और व्यय से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं ताकि कोई छेड़छाड़ न हो सके।
कलेक्टर को भी भेजी गई प्रतिलिपि
इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पार्षद गजेन्द्र राय ने इसकी एक प्रतिलिपि जिला कलेक्टर महोदया, निवाड़ी को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की है, ताकि इस बात की विशेष जांच हो सके कि किस प्रकार प्रशासनिक पद और नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है।
पार्षद ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस मामले में वैधानिक कदम नहीं उठाए गए, तो वे समस्त साक्ष्यों के साथ उच्च अधिकारियों एवं माननीय न्यायालय के समक्ष न्याय की गुहार लगाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेंगे।
विशेष नोट: टुडे इंडिया न्यूज एमपी इस प्रशासनिक मामले की पल-पल की अपडेट अपने पाठकों तक पहुँचाता रहेगा। स्थानीय प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है, इस पर हमारी विशेष नजर बनी हुई है।




