https://todayindianewsmp.live/wp-content/uploads/2024/01/jjujuu.gifUncategorizedउत्तर प्रदेशकेरलमकोलकत्ताटॉप न्यूज़दिल्ली NCRदुनियादेशनईदिल्लीनिवाड़ीभोपालमध्य प्रदेशरक्षाराजनीतिराज्यसेवा तीर्थ PMOसोशल मीडिया प्लेटफार्म

​सड़कों पर जेन-Z का विद्रोह या कोई खतरनाक विदेशी साजिश? फ्रांस से लेकर भारत तक फैला ‘रेड-ग्रीन’ टूलकिट नेटवर्क, उजागर हुआ मास्टरमाइंड का नाम

फ्रांस की सड़कों पर हिंसक प्रदर्शनों के पीछे मासूम छात्र नहीं, बल्कि एक बड़ा इंटरनेशनल टूलकिट नेटवर्क सक्रिय।कम्युनिस्टों (रेड) और कट्टरपंथियों (ग्रीन) के गठजोड़ ने दुनिया भर के देशों में अस्थिरता फैलाने का उठाया बीड़ा।​फॉक्स न्यूज डिजिटल की जांच में बड़ा खुलासा: चीनी फंडिंग से चलने वाले 'नेविल रॉय सिंघम' का नाम मास्टरमाइंड के रूप में आया सामने।​फ्रांस के छात्र आंदोलन की आड़ में भारत विरोधी नैरेटिव और सोशल मीडिया पर रची जा रही साजिशों के तार बेनकाब।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी। देश, दुनिया,भारत :- 

​हाल के दिनों में फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत कई यूरोपीय शहरों की सड़कें सुलग रही हैं। स्कूलों के बजट में कटौती, शिक्षा व्यवस्था की जर्जर हालत और बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसे मुद्दों को लेकर जेन-Z (Gen-Z) यानी युवा पीढ़ी सड़कों पर उतरी है। ऊपरी तौर पर देखने पर यह छात्रों का एक स्वतःस्फूर्त और स्वाभाविक आक्रोश लग सकता है, लेकिन फॉक्स न्यूज डिजिटल की एक हालिया इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बेहद खतरनाक और गहरे षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है।

​क्या है यह ‘रेड-ग्रीन’ टूलकिट नेटवर्क?

​रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के स्कूलों और सड़कों पर चल रहे इस आंदोलन की कहानी सिर्फ स्थानीय स्तर पर शिक्षा सुधारों की मांग तक सीमित नहीं है। इसके पर्दे के पीछे एक इंटरनेशनल नेटवर्क काम कर रहा है, जिसे ‘रेड-ग्रीन अलायंस’ (Red-Green Alliance) नाम दिया गया है।

  • ​कम्युनिस्ट (रेड) और कट्टरपंथी (ग्रीन): इस गठजोड़ में वामपंथी विचारधारा के लोग और कुछ विशेष कट्टरपंथी समूह मिलकर काम कर रहे हैं।
  • ​रणनीति: इनका मुख्य उद्देश्य दुनिया के लोकतांत्रिक देशों की सरकारों, पुलिस तंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ सुनियोजित तरीके से अस्थिरता और अराजकता पैदा करना है। फ्रांस के प्रदर्शनों में स्कूली किताबों और शिक्षा से जुड़े नारों के बजाय कम्युनिस्टों के ‘हंसिया-हथौड़े’ वाले लाल झंडे और फिलीस्तीनी झंडों का बड़ी संख्या में लहराया जाना इस बात की पुख्ता गवाही देता है।

​कौन है इस खतरनाक खेल का मास्टरमाइंड?

​इस पूरी साजिश के केंद्र में चीनी फंडिंग और एक बड़े ग्लोबल नेटवर्क का नाम सामने आ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को परोक्ष रूप से आर्थिक बल देने और प्रोपेगैंडा फैलाने में नेविल रॉय सिंघम (Neville Roy Singham) का नाम मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में उभरकर आया है। जांच में यह बात सामने आई है कि न्यूयॉर्क स्थित ‘द पीपुल्स फोरम’ (The People’s Forum) जैसे संगठनों को अकेले नेविल रॉय सिंघम द्वारा 22 मिलियन डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग 180 करोड़ रुपए) से अधिक की भारी-भरकम फंडिंग दी गई है, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में भारत विरोधी और राष्ट्र-विरोधी एजेंडे चलाने व यूथ प्रोटेस्ट को दिशा देने के लिए किया जाता है।

​फ्रांस से लेकर भारत तक जुड़े हैं तार

​यह अंतरराष्ट्रीय टूलकिट नेटवर्क सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार भारत तक जुड़े बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ‘इंडियन अलायंस पेरिस’ जैसे संगठनों द्वारा फ्रांस के इन हिंसक छात्र आंदोलनों का खुलेआम समर्थन किया गया है। इतना ही नहीं, इन अराजक तत्वों ने फ्रांस के छात्र आंदोलनों की तुलना सीधे भारत के विभिन्न छात्र आंदोलनों से करते हुए कोडवर्ड्स और विशेष इमोजी के जरिए एक खतरनाक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की है।

​सुरक्षा एजेंसियों और मीडिया रिपोर्ट्स का मानना है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, वायरल वीडियोज और चुनिंदा इनफ्लुएंसर्स का इस्तेमाल करके युवाओं के कंधों पर बंदूक रखकर वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को कमजोर करने का यह एक नया और खतरनाक पैटर्न है। भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है कि कैसे स्थानीय मुद्दों या जेन-Z के असंतोष को विदेशी फंडिंग और टूलकिट के जरिए देश के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!